अल्लाह तआला

 

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ” शुरू अल्लह के नाम से निहायत ही मेहरबान व बड़ा रहम वाला है “

अल्लाह तआला 

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अकीदा :- तमाम आलम व जमीन आसमान वगेरह सारा जहन पहले बिलकुल नापैद था यनी कुछ भी

पैदा नहीं था कोई चीज़ भी नहीं थी.  फिर अल्लाह तआला ने अपनी कुदरत से सबको पैदा किया तो यह सब कुछ

मौजूद हुआ

अकीदा:- जिसने तमाम आलम और सरे जहां को पैदा किया उसी पाक जात का नाम “अल्लाह” है.

अकीदा:- अल्लाह तआला एक है कोई उसका शरीक नहीं वह हमेशा से है और हमेशा रहेगा

वह बे परवाह है किसी का मोहताज़ नहीं है बल्कि सारी दुनिया सारा आलम उसी का मोहताज़ है

कोई चीज़ उसके बराबरनहीं वह एक है और सबसे निराला है

और अल्लाह पाक  ही सबका खालिक व मालिक है

अकीदा :- अल्लाह तआला जिंदा है और वो कुदरत वाला है वह हर चीज़ को जानता है सब कुछ देखता है.

सब कुछ सुनता है सबकी जिंदगी और मौत का मालिक अल्लाह पाक है

वही सबको जिंदगी देता है जिसको जब चाहे जिंदा रखे और जब चाहे मौत दे सबको रोज़ी रिजक देने

वाला अल्लह पाक है अल्लाह तआला चाहे इज्जत दे या ज़िल्लत दे ये उसी की मर्ज़ी है

वो जो चाहे कर सकता है , सिर्फ वही इबादत के लायक है उसका कोई मुकाबला नहीं

न उसको किसी पैदा किया और न ही वो किसी से पैदा हुआ न वो बीवी वाला है और न ही बच्चे वाला .

(कुरआन माजिद )

अल्लाह पाक 

अकीदा :- वह कलाम फरमाता है , लेकिन उसका कलाम हम कोगो के कलाम की तरह नहीं है

वह जबान, आँख, कान, नाक, वगेरह से और हर ऐब से और हर नुक्सान से पाक है.

अकीदा:- उसकी सब सिफते हमेशा से है और हमेशा रहेंगी, कोई सिफत उसकी कभी न खत्म हो

सकती है न घट बढ़ नहीं सकती .

अकीदा:- वह अपनी पैदा की हुई हर चीज़ पर बड़ा मेहरबान है अल्लाह पाक ही सबको पालता है

वह बड़ाई वाला और बड़ी इज्जत वाला है , सब कुछ उसी के कब्जा और इख्तियार में है

जिसको चाहे पस्त करदे और जिसको चाहे बुलंद करदे जिसकी चाहे रोजी कम करदे

जिसकी चाहे ज्यादा करदे , वह इंसाफ वाला है किसी पर जुल्म नहीं करता

वह बड़े तहम्मुल और बर्दाश्त वाला है ,वह गुनाहों को बख्शने वाला और बन्दों की दुआओं को

काबुल फरमाने वाला है . वह सब पर हाकिम है उसपर कोई हुक्म चलाने वाला नहीं .

न उसको उसके इरादोसे कोई रोकने वाला है , वह सब का काम बनाने वाला है .

दुनिया में जो कुछ होता है उसी के हुक्म से होता है बगैर उसके हुक्म के कोई ज़र्रा हिल नहीं सकता .

उसके किसी के काम हुक्म में किसी के रोकटोक की कोई मजाल नहीं .

अल्लाह तआला  तमाम आलम और सारे जहां की हिफाज़त फरमाने वाला और तमाम जहा का

इंतज़ाम फरमाने वाला है . वह न सोता है न उन्घ्ता है न कभी गाफिल होता है

( कुराने व शरहे अकाईद वगेरह )

अल्लाह तआला 

अकीदा:- अल्लाह  तआला पर कोई चीज़ वाजिब नहीं और लाजिम नहीं है . वह जो कुछ करता है

उसका फज्ल और मेहेरबानी है .(शरहे अकाईद वगेरह)

अकीदा:- वह मखलूक की तमाम सिफ्तो ए पाक है वह बड़ा ही रहीम व करीम  है , वह अपने बन्दों को

किसी ऐसे काम का हुक्म नहीं देता जो बन्दों से न हो सके वह अपने बन्दों की बद अमलियो और गुनाहों से

नाराज होता है और बन्दों की नेकियो और इबादतों से खुश होता है. इसलिए उसने गुनाहगारो के लिए

दोजख का अज़ाब और नेको के लिए ज़न्नत का सवाब बनाया है.

(कुरआन माजिद व कुतुबे अकाएद)

अकीदा:- अल्लाह तआला जेहत और मकान व जमान और हरकत व सुकून और शक्ल व सुरत

वगेरह म्ख्लुकात की तमाम सिफत व कैफ़ियात से पाक है .(शरहे  अकैईद वगेरह )

अकीदा:- दुनिया की जिंदगी में सर की आँखों से अल्लाह तआला का दीदार सिर्फ हमारे नबी

मुहम्मद मुस्तफा सल्लाहू अलैहि वसल्लम आपको हासिल हुआ , हाँ दिल की निगाहों से

या ख्वाब में अल्लाह तआला का दीदार दुसरे अम्बिया अलैहिमुस्सलाम बल्कि बहुत से औलियाए किराम

को भी नसीब हुआ और आखिरत में हर सुन्नी मुसलमान को अल्लाह तआला अपना दीदार दिखायेगा

मगर याद रखो की आल्हा तआला का दीदार बिला कैफ है यानि देखंगे मगर यह नहीं कह सकते की कैसे?

और किस तौर पर  देखंगे ? इंशाल्लाह तआला जब देखेंगे उस वक़्त पता चल जायेगा. इसमें बहस करना जाएज़ नहीं

यह ईमान रखो की कियामत में जरुर अल्लाह तआला का दीदार होगा, जो आखिरत की नेअमतो

में से सबसे बड़ी नेअमत है ( शरहे अकाइद वगेरह )

अल्लाह तआला 

अकीदा:- अल्लाह तआला के हर काम में बेशुमार हुक्मते है ख्वाह हमको मालूम हो या न मालूम हो

अल्लाह तआला को किसी काम को बुरा समझना या उसपर एतराज़ करना या नाराज़ होना यह कुफ्र की

बात है . खबरदार कभी हरगिज़अल्लाह तआला के कसी काम पर न एतराज़ करो न नाराज़ हो

बल्कि यही इमान रखो की  अल्लाह तआला जो कुछ करता है वही  अच्छा है चाहे हमारी समझ में आये

या न आये  क्योंकि अल्लाह तआला अलीम व हाकिम यानि बहुत ज्यादा जानने वाला और बहुत

हिकमतो वाला है . और वह अपने बन्दों पर बहुत ज्यादा मेहरबान है .

दोस्तों आपको पोस्ट केसी लगी कमेंट करके जरुर बताईये मिलते है अगली पोस्ट में अल्लाह हाफ़िज़ !

हज़रत अली की बाते

 

 

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