इब्लीस का पोता

अस्सलाम अलैकुम इस पोस्ट में हम सच्ची हिकायत में इब्लीस का पोता ये वाकिया पढेंगे बच्चो के लिए सच्ची हिकायत बहुत ही अच्छी पोस्ट्स है जिनमे सही वाकियात और बुजुर्गाने दिन की हिकायत है जो जहानी तौर पर बच्चो के लिए एक स्टोरीज की तरह हम पढ़ सकते है उन्हें बता सकते है ये वाकियात सही में हुए है और बुजुर्गाने दिन की किताबो में से हम ने भी रेफ़रन्स लिया है गौर फरमाईये 

इब्लीस का पोता | सच्ची हिकायत | Iblis Ka Pota | sachchi hikayat 

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हलाल रोजी का बयान

सच्ची हिकायत  

बेहेकी में आमिर-उल-मोमिनीन हजरते उमर फारुक रज़ी अल्लाहो तआला अन्हु से रिवायत है की 

एक रोज हम हुजुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम के हमराह तहामा की पहाड़ी पर बैठे थे 

के अचानक एक बुढा हाथ में असा लिए हुए हुजुर रसूल-उल-सकलेन सय्यद-उल-अम्बिया सल्लल्लाहो 

अलैहि व सल्लम के सामने हाजिर हुआ और सलाम अर्ज किया , हुजुर  अलैहिस्सलाम ने जवाब दिया 

और फरमाया , उसकी आवाज़ जीनो की सी है , फिर आपने उससे दरयाफ्त किया तू कौन है ? 

उसने अर्ज किया मई जिन्न हु मेरा नाम ‘हामा’ है बेटा हेम का, हेम बेटा लाकिस का, और लाकिस 

बेटा इब्लीस का है . हुजुर अलैहिस्सलाम ने फरमाया तो गोया तेरे और इब्लीस के दरमियाँ सिर्फ दो पुश्ते है 

फिर आपने फरमाया अच्छा ये बताओ तुम्हारी उम्र कितनी है ? उसने कहा या रसूल अल्लाह ! जितनी उम्र 

दुनिया की है उतनी ही मेरी है कुछ थोड़ी सी कम है .

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इब्लीस का पोता 

हुजुर जिन दिनों काबिल ने हाबिल को कत्ल किया था उस वक़्त मै कई बरस का बच्चा ही था 

मगर बात समझता था , पहाडो में दौड़ता फिरता था, और लोगो का खाना व गल्ला चोरी कर

लिया करता था, और लोगो के दिलो में वस्वसे भी डाल देता था. के वो खविश  और अपने 

करीबी से बदसुलूकी करें.

हुजुर अलैहिस्सलाम ने फरमाया , तब तो तुम बहुत बुरे हो , उसने अर्ज किया हुजुर मुझे मलामत 

न फरमाईये इसलिए के अब मै हुजुर अलैहिस्सलाम की खिदमत में तौबा करने हाजिर हुआ हूँ,

या रसूल अल्लाह ! मैंने हजरते नूह अलैहिस्सलाम से मुलाकात की है और एक साल तक 

उनके साथ उनकी मस्जिद में रहां हूँ. उससे पहले मै उनकी बारगाह में भी तौबा कर चुका हूँ.

हजरते हुद अलैहिस्सलाम , हजरते याकूब अलैहिस्सलाम, और हजरते युसूफ अलैहिस्लाम की 

सोहबतो में भी रह चुका हूँ. और उन से तौरात सीखी है और उनका सलाम हज़रत इसा  अलैहिस्सलाम 

को पहुंचाया था. और ऐ नबियो के सरदार इसा अलैहिस्सलाम ने फरमाया था की , अगर तू मोहम्मद 

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो तआला अलैह व सल्लम से मुलाक़ात करे तो मेरा सलाम उनको पहुंचाना 

सो हुजुर ! अब मै इस अमानत से सबुकदोश  होने को हाजिर हुआ हु और ये भी आरजू है के आप 

अपनी जबाने हक़ तर्जुमान से मुझे कुछ कलाम अल्लाह तलीम फरमाईये , हुजुर अलैहिस्सलाम ने 

उसे सुरह मुरसलात , सुरह अम्मायतासअलून, सुरह अखलास , और मऊजतीन, और इज़ा अश्शम्स

तालीम  फरमाई और ये भीं फरमाया के ऐ हामा जिस वक़्त तुम्हे कोई अहेतियाज़ हो फिर मेरे पास

आ जाना और हमसे मुलाकात ना छोड़ना .

इब्लीस का पोता 

हजरते उमर रज़ी अल्लाहो अन्हु फरमाते है हुजुर अलैहिस्सलाम ने तो विसाल फरमाया लेकिन 

हामा के बाबत फिर कुछ ना फरमाया , खुदा जाने हामा अब भी ज़िंदा है या मर गया है 

(खुलासात-उल-तफ़सीर सफा नं १७०)

सबक:

हमारे हुजुर सल्ललाहो अलैहि व सल्लम रसूल-उल-सकलेंन और रसूल अलकुल है और आपकी 

बारगाहे आलिया जिन्नों इन्स की मरजऐ है .

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