औरत क्या है ?

औरत क्या है ?

औरत क्या है ?

औरत – खुदा की बड़ी बड़ी नेअमतो में से एक बहुत बड़ी नेअमत है

दुनिया की आबादकारी और दीनदारी में मर्दों के साथ तकरीबन बराबर की शरीक है

औरत – मर्द के दिल का सुकुं, रूह की  राहत , जेहन का इत्मिनान , बदन का चैन है.

-दुनिया के खुबसूरत चेहरे की एक आँख है , अगर औरत न होती तो दुनिया की सुरत कानी होती

औरत – आदम अलैहिस्सलाम व हज़रत हव्वा के सिवा तमाम इंसानों की माँ है. इस लिए वह सब के लिए

काबिले एहतेराम है

औरत – का वजूद इंसानी तमद्दुन के लिए बेहद जरुरी है अगर औरत न होती तो मर्दों की ज़िन्दगी जंगली

जानवरों से बद टार होती

औरत – बचपन में भाई बहनों से मुहब्बत करती है , शादी के बाद अपने शोहर से मुहब्बत करती है ,

और माँ बन कर अपनी औलाद से मुहब्बत करती है. इस लिए औरत दुनिया में प्यार व मुहब्बत का एक ताज महल है

औरत क्या है ?

दोस्तों आपने देखा की औरत का इस्लाम में क्या मर्तबा है उसका होना दुनिया और हमारी तमाम

जिंदगी के लिए बहुत जरुरी है. अल्लाह पाक ने मर्द की पसली से औरत को बनाया है एसा कहा जाता है .

औरतो की और मर्दों की ज़िन्दगी के पड़ाव एक से है जेसे बचपना , जवानी, बुढ़ापा और हम इसे

इस तरह से भी देखते है की औरत  का बचपना , जवानी शादी के बाद की जिंदगी ,

औरत माँ बन जाने के बाद. और बुढ़ापा.

आने वाली पोस्ट्स में हम औरतो की आने वाली जिंदगी यानि उसके बचपने से लेकर शादी के बाद

और माँ बन्ने के बाद उसकी जिंदगी कैसी होती है . इस्लाम में औरतो को बहुत ही

इज्जत दी है मर्दों के बराबर ही उसे भी बराबरी का हक़ दिया गया है .

दोस्तों आने वाली पोस्ट्स में हम पढेंगे औरती की जिंदगी इस्लाम आने से पहले लैसी थी उस पर

केसे केसे जुल्म किये जाते थे और इस्लाम आने के बाद उनकी जिंदगी में केसे रौशनी आई और किनकी वजह से आई

मिलते है अगली पोस्ट में अल्लाह हाफ़िज़ ! जज़कल्लाह खैर !

अल्लामा इक्बाल की शायरी

 

 

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