निकाह कहा करे ?

बिस्मिल्लाहहिर्रहमाननिर्रहीम 

अस्सलाम अलैकुम दोस्तों इस पोस्ट में हम पढेंगे की अच्छा रिश्ता कहा करे यानि निकाह कहा करे?

दोस्तों हमे यह जानना जरुरी है की सुन्नी सहिउल अकीदा बच्चे बच्चियों का निकाह केसी जगह करना चाहिये

, उनके मुताबिक अच्छे रिश्ते तलाश करना चाहिए ये माँ बाप का फ़र्ज़ है की उन्हें नेक रिश्ते ही देख कर

निकाह किया जाये आईये जानते है इस बारे में .

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निकाह किन लोगो से जाईज़ नहीं ?

निकाह कहा करे ?

हदीस: उम्मुल मोमिनीन हज़रत आइशा सिद्दीका, हज़रत अनस बिन मालिक,हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ी

अल्लाहु अन्हुम से रिवायत है की, हुजूरे अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :-

अपने नुत्फो के लिए (यानि शादी के लिए) अच्छी जगह तलाश करो . कुफ्व (यानि बिरादरी| बराबरी) में शादी करो

और कुफ्व से निकाह कर लाओ की औरते अपने कुनबे के जैसे बच्चो को जन्म देती  है .

इस हदीस पाक से दो बाते मालूम हुई एक तो यह की शादी के लिए अच्छी जगह तलाश की जाये , दूसरी यह की अपने

कुनबे बिरादरी में निकाह करना बेहतर है. अपनी बिरादरी में निकाह करने के बहुत से फायदे है.

मसलन:- औलाद अपने बिरादरी के लोगोके जैसी पैदा होगी जिसकी वजह से लोग देखते ही पहचान जायेंगे

की यह सैय्येद है, यह पठान है , यह शेख है, और दुसरा फायदा यह है की, बिरादरी की गरीब लडकियों की

जल्द से जल्द शादी हो जाएगी .तीसरा फायदा यह है की शादी में खर्चे कम होंगे . चौथा फायदा यह है की

अपनी ही बिरादरी की लड़की हो तो बिरादरी के तौर तरीके, रहन सहन, तहजीब व तमद्दुन से पहले ही से

जानकार होती है लिहाजा घर में ना इत्तेफाकी, इख्तेलाफ, झगड़े, फसाद, का माहौल पैदा नहीं होता.

निकाह कहा करे ?
निकाह कहा करे ?

निकाह किस जगह करना चाहिए ?

पांचवा फायदा यह है की बिरादरी की वह लडकिया जो बहुत ज्यादा खुब्सुरत नहीं  है उनकी भी शादी हो जाएगी.

अक्सर देखा गया है की लोग दुसरो की बिरादरी से लोग खुब्सुरत लड़की तलाश करके निकाह करके ले आते है

और इसी वजह से उनके कुनबे की लडकिय कुंवारी रह जाती है. और उन बेचारी लडकियों की शादी नहीं हो पाती

किसी उम्र तक  या तो वो बुरे कामो में लग जाती है या तो फिर किसी  बदमाश आवारा के साथ भाग जाती है.

फिर किस्म किस्म की मुख्तलिफ बुराईयों में फस जाती है. इन वजह से भी बिरादरी में ही निकाह करना जरुरी है.

हदीस:- हज़रत इमाम मुहम्मद बिन इस्माईल बुखारी रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु रिवायत करते है :-

निकाह कहा करे ?

अच्छी नस्ल में शादी करो , रागे खुफिया अपना काम करती है

हदीस:- और फरमाते है हमारे प्यारे आका सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम :- 

निकाह कहा करे ?

घोड़े की हरियाली से बचो और बुरी नस्ल में खुबसूरत औरत से .

निकाह क्यों जरुरी है ?

निकाह कहा करे ?

लड़की का खुब्सुरत होना काफी नहीं बल्कि खूबी तो यह है की लड़की पर्दादार , नमाज़ व रोजे की पाबन्द  हो,

उस्का खानदान तहजीब तमद्दुन में , रहन सहन में दुरुस्त हो, बिल-खुसूसी सुन्नी सहिउल अकीदा हो.

अगर आपने इन सब बातो का ख्याल रखते हुए निकाह किया तो आपकी दुनिया आखिरत कामियाब है .

और आगे एसी लड़की के जरिये फर्माबरदार, मजहबी व दुनियावी खूबी से सजी हुई एक बेहतर नस्ल जन्म लेती है.

चुनांचे सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हमें इन्ही बातो का हुक्म दिया है .

हज़रत इमाम मुहम्मद गजाली रज़ी. अल्लाहु तआला अन्हु इरशाद फरमाते है ,

“औरत अच्छे नसब वाली शरिफुन्नफ्स   हो . यानि ऐसे खानदान से ताल्लुक रखती हो जिसमे दयानत और नेक बख्ति

पाई जाए. क्यूंकि ऐसे खानदान की औरत अपनी औलाद की तालीम व तरबियत का एहतेमाम करती है”

(इहयाउल-उलूम . जोल्ड २, सफा नंबर ७६)

निकाह कहा करे ?

हदीस :हज़रत  अबू हुरैरह व हज़रत जाबिर रजी. अल्लाहु तआला अन्हुमा से रिवायत है की नाबिए करीम 

हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया :-

निकाह कहा करे ?

औरत से चार चीजों की वजह से निकाह किया जाता है , उसके माल के सबब , उसके खान्दान के सबब,

उसके हुस्न व जमाल के सबब और उसके दीनदार होने के सबब , लेकिन तू दीनदार औरत को हासिल कर .

इस हदीसे करीमा से मालूम हुआ की , दीनदार औरत से निकाह करना अफज़ल  है, दीनदार औरत शोहर

की मददगार होती है और थोड़ी रोज़ी पर कनाअत कर लेती है. इसके बार खिलाफ दिन से दूर औरते

नाशुक्र गुजार, ना फरमान , और शोहर की शिकायत दुसरो के सामने बयान करने वाली होती है और गुनाह

व मुसीबत में मुब्तला कर देती है .

आला हज़रत इमाम अहमद रजा कादरी रजी अल्लाहु तआला अन्हु “फतावा रजविया ” में फरमाते है,

“दीनदार लोगो मे शादी करे की बच्चे पर परनाना, मामू की आदतों और हरकतों का भी असर पड़ता है .

(फतावा रजविया, जिल्द 9, निष्फ अव्वल, सफा नंबर ४६)

निकाह कहा करे ?

हदीस:- नाबिए करीम सल्लल्लाहु तआला  अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया :-

निकाह कोंसी जगह करना चाहिए

औरतो से उनके हुस्न के सबब शादी न करो हो सकता है की उनका हुस्न तुम्हे तबाह कर दे न उनसे माल के

सबब शादी करो हो सकता है की उनका माल तुम्हे गुनाहों में मुब्तिला कर दे . बल्कि दिन की वजह से

निकाह किया करो , काली चपटी बदसूरत लौंडी अगर दीनदार हो तो बेहतर है.

हुज्जतुल-इस्लाम हज़रत सैय्यदना इमाम मुहम्मद गजाली रज़ी. अल्लाहु तआला अन्हु इरशाद फरमाते है:

“अगर कोई औरत खुबसूरत तो है मगर परहेजगार व पारसा नहीं तो बुरी बला है, बद मिजाज औरत

नाशुक्र गुजार, जुबान दराज़ होती है मर्द पर बेजा हुकूमत करती है , एसी औरतो के साथं जिंदगी बदमजा हो

जाती है. और दिन में खलल पड़ता है “(कीमियाए सआदत , सफा नंबर २६०)

याद रखिये अगर आपने सिर्फ एसी लड़की से निकाह किया जो माल व दौलत तो खूब साथ लायी और

खुबसूरत भी बहुत थी लेकिन दीनदार नहीं और न ही तहजीब व अख़लाक़ के मुआमले में बेहतर तो

आप उसके साथ यक़ीनन एक अच्छी और खुशहाली ज़िन्दगी नहीं गुजार सकते . एसी लड़की की

वजह से घर में हमेशा जहनी तनाव और आये दिन फ घर में झगड़े फसाद का महाल बना रहता है .

नतीजा यह की आखिरकार लड़के को माँ बाप से दूर होना पड़ता है इसलिए जहा आप खूबसूरती

माल  व दौलत  को देखते है उन सबसे ज्यादा अहम है की  आप सबसे पहले लड़की का अख़लाक़

उसका खानदान और ख़ास कर वह दीनदार है या नहीं , यह जरुर देखिये तब ही आप एक कामयाब

जिंदगी के मालिक बन सकते है. 

निकाह कहा करे ?

अगर एक खुबसूरत लड़की में यह खुबिया नहीं और इसके बरअक्स किसी बदसूरत लड़की में 

दीनदारी हो तो वह बदसूरत लड़की उस खुबसूरत लड़की से बेहतर है. अक्सर हमारे मुस्लिम भाई 

दौलतमंद फैशन परस्त लड़की पर मरते है और दौलत को बहुत ज्यादा अहमियत देते है , जब की 

दौलत से ज्यादा दीनदारी को अहमियत देनी चाहिए . 

हदीस:- हुजूरे अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया :

“जो कोई हुस्न व जमाल या माल व दौअलत की खातिर किसी औरत से निकाह करेगा तो वह  दोनों से महरूम 

रहेगा. और जब दिन के लिए निकाह करेगा तो दोनों मकसद पुरे होंगे (कीमिया-ए-सआदत , सफा नंबर २६०)

हदीस:- और फ़रमाया रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने  :

” औरत की तलब दिन के लिए ही करनी चाहिए जमाल के लिए नहीं “इसका यह माना है की, 

सिर्फ खूबसूरती के लिए निकाह ना करे न यह की खुब्सुरति ढूंढे ही नहीं अगर निकाह करने से 

सिर्फ औलाद हासिल करना ही किसी शख्स का मकसद है खूबसूरती नहीं चाहता , तो यह परहेज़गारी है.

(कीमिया-ए-सआदत , सफा नंबर २६०)

आयात :- अल्लाह अजजा व जल्ला इरशाद फरमाता है:

तर्जमा :- अगर वह फ़क़ीर (गरीब) हो तो अल्लाह उन्हें गनी कर देगा अपने फज्ल के सबब (पारा न. 18 सुर: नूर )

निकाह कहा करे ?

लिहाज़ा अगर किसी लड़की में दीनदारी ज्यादा हो चाहे वह कितनी ही गरीब क्यों न हो उस से शादी करना 

बेहतर है .

सबक 

क्या अजब की अल्लाह तआला उस से शादी करने और उसकी बरकत से आपको भी दौलत से 

नवाज दे. आपको उस नेक और गरीब लड़की से ख़ुशी  औए वह दिली सुकून हासिल हो सकता है जो एक 

दौलतमंद बदमिजाज मोडर्न फेशन परस्त लड़की से हासिल नहीं हो सकता . हा अगर कोई लड़की दौलतमंद 

होने के साथ साथ ही दीनदार , नेक सीरत, खुश अख़लाक़, पर्दादार हो और एसी लड़की से कोई शादी करे 

तो यह यक़ीनन बड़ी खुश नसीबी की बात है . बेशक अल्लाह तआला माल व दौलत और चेहरे को नहीं देखता 

बल्कि तक्वा व परहेज़गारी को देखता है . अल्लाह पाक ने बड़ी  खूबसूरती से गरीब बच्चियों के लिए और जो बच्चिया चाहे वो 

देखने में भले ही अच्छी न हो लेकिन अख़लाक़ में अच्छी है उन के लिए या यु कहे की हम जेसो के लिए कितनी अच्छी बाते कही है 

और इन्ही की वजह से गरीब बच्चियों के लिए निकाह के लिए रस्ते खोल दिए है .

में बस अल्लाह पाक से दुआ करुँगी की अल्लाह पाक हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल 

करने की तौफीक अता फरमाए आमीन  या रब्बुल आलमीन 

 

मुसलमान औरतो का पर्दा

 

 

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