निकाह किन लोगो से जाईज़ नहीं ?

बिस्मिल्लाहहिर्रहमाननिर्रहीम  

निकाह किन लोगो से जाईज़ है ?

दुनिया में  इंसान के वजूद को बाकि रखने के लिए कनुने खुदा के मुताबिक दो मुखालिफ जिन्स का आपस में मिलना जरुरी है. लेकिन इसी कानून के मुताबिक कुछ ऐसे नही इंसान होते है जिनका जिंसी तौर पर आपस में मिलना कनुएँ खुदा के खिलाफ है . दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम मालूम करेंगे की निकाह किन लोगो से जाईज़  है और किन लोगो से जाईज़ नहीं ?

निकाह किन लोगो से जाईज़ नही ?
निकाह किन लोगो से जाईज़ नही ?

यह भी पढ़े निकाह क्यों जरुरी है ?

आयत : अल्लाह रब्बुल इज्ज़त इरशाद फरमाता है :

तर्जमा : हराम हुई तुम पर तुम्हारी माएं और बेटिया और बहने और फुफिया और खालाये और

भतीजिया और भांजिया और तुम्हारी माए जिन्होंने दूध पिलाया और दूध की बहने और

तुम्हारी औरतो की माए (तर्जमा कन्जुल ईमान )

कुराने करीम की इस आयत से मालूम हुआ की माँ, बेटी, बहन, फूफी, खाला, भतीजी, भांजी, दादी, नानी, पोती, नवासी, सगी सास, वगेरह से निकाह करना हराम है .

 

निकाह किन लोगो से जाईज़ नहीं ?

मसला:- सगी माँ हो या सौतेली , बेटी सगी हो या सौतेली, बहन सगी हो या सौतेली, इन तमाम से निकाह हराम है

इसी तरह दादी , पर दादी ,नानी पर नानी, पोती, पर पोती, नवासी, पर नवासी, बिच में चाहे कितनी ही 

पुश्तो का फासिला हो उन सबसे निकाह करना हराम है.

मसला: फूफी, फूफी की फूफी, खाला, खाला की खाला, भतीजी, भांजी, और भांजी की लड़की,

या उसकी नवासी या पोती, इन तमाम से भी निकाह हराम है.

मसला: जीना से पैदा हुई बेटी उसकी पोती उसकी नवासी इन तमाम से भी निकाह करना हराम है

( बहरे शरीयत जिल्द१, हिस्सा नंबर 7, सफ;14, कनुने शरियत जिल्द२, सफा ;४७)

हदीस : हज़रत उमरा बिन्ते अब्दुर्रहमान हज़रत मौला अली रज़ी अल्लाहु  तआला अन्हुमा से रिवायत है की 

सरकारे मदीना सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

तर्जमा: रजाअत (दूध के रिश्ते )से भी वह रिश्ते हराम हो जाते है जो वेलादत से हराम होते है 

यानि किसी औरत का दूध बचपन में पिया तो उस औरत से माँ का रिश्ता कायम हो जाता है अब उसकी बेटी बहन हे 

उस से निकाह हराम है, हासिले कलाम यश की जिस तरह सगी माँ के जिन रिश्तेदारों से शरियत में निकाह 

हराम है इसी तरह दुश पिलाने वाली औरत के उन रिश्तेदारों से भी निकाह हराम है.

मसला: निकाह हराम होने के लिए ढाई बरस का ज़माना है , कोई औरत किसी बच्चे को ढाई बरस के अंदर अगर

दूध पिलाएगी तो हुरमत ( यानि निकाह हराम होना )साबित हो जाएगा . अगर ढाई बरस की उम्र के बाद पिया तो 

हुरमत साबित नहीं होगी (यानि निकाह हराम नहीं होगा )

(बहरे शरियत जिल्द 1, हिस्सा नंबर 7, सफा नंबर 19, कनुने शरियत जिल्द २ सफा नंबर ५०)

निकाह किन लोगो  नहि किया जा सकता ?

हदीस : हज़रत अबू हुरैराह रज़िअल्लहु तआला अन्हु से रिवायत है: की सय्यदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने

इरशाद फ़रमाया: तर्जमा: कोई शख्स अपनी बीवी के साथ  उसकी भतीजी या भांजी से निकाह न करे 

मसला: औरत (बीवी) की बहन, चाहे सगी हो या रजाई (यानि दूध की शरीक) हो , बीवी की  खाला या फूफी चाहे सगी हो

या रजाई , इन सबसे भी बीवी की मौजूदगी में निकाह हराम है अगर बीवी को तलाक दे दी हो तो जब तक औरत की इद्दत 

खत्म न हो उसकी बहन , फूफी, खाला, वगेराह से निकाह नहीं कर सकता ( कनुने शरीयत जिल्द २. सफा ४८ )

हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रज़िअल्लहु तआला अन्हुमा से इमाम बुखारी रज़ीअल्लाहु  अन्हु रिवायत करते है

तर्जमा : चार से ज्यादा बिविया इसी तरह हराम है जैसे आदमी की अपनी बेटी और बहन .

मसला: जिसमे मर्द औरत दोनों की निशानिया पायी जाए और यह साबित न हो की , मर्द है या औरत  तो उससे

न मर्द का निकाह हो सकता है और न औरत का आहार किया गया तो महज बातिल है (यानि निकाह न होगा )

( बहरे शरियत हिस्सा 7, सफा 6)

एसा शख्स जो शराबी हो या किसी तरह का नशा करता हो उससे भी रिश्ता नहीं करना चाहिए 

हदीस: हजुरे अकरम  सल्लल्लाहु  अलैहि  वसल्लम इरशाद फरमाते है: “शराबी के निकाह में

अपनी लड़की न दो शराबी बीमार पड़े तो उसे देखने न जाओ , उस जात की कसम जिसने नबीए बरहक 

बना कर भेजा शराब पिने वाले पर तमाम आसमानी किताबो में लानत आई है .(तम्बिहुल-गफिलिन , सफा १६२)

निकाह किन लोगो से जाईज़ नहीं ? 

हदीस: हज़रत इमाम अबुल्लैस समरकंदी रज़ियाल्लाहू तआला  अन्हु अपनी सनद के साथ अपनी तस्निफे लतीफ़ 

“तम्बिहुल गफिलिन ” में रिवायत करते है :” बहुत से सहबाए किराम से रिवायत है की जिसने अपनी बेटी का निकाह 

शराबी मर्द से किया तो उसने उसे जीना के लिए रुखसत किया मतलब यह की शराबी आदमी नशे में 

बक्सरत तलाक का जिक्र करता है जिससे उसकी बीवी उस पर हराम हो जाती है “

( तम्बिहुल गफिलिन सफा नंबर १६९)

काफिर व मुशरिक मर्द या औरत से मुसलमान मर्द या औरत का निकाह करना हराम है 

आयत : अल्लाह रब्बुल इज्ज़त इरशाद फरमाता है:और मुशरिको के निकाह में न दो जब तक वह ईमान न लाये 

(तर्जमा कन्जुल ईमान )

मसला: मुसलमान औरत का निकाह मुसलमान मर्द के सिवा किसी भी मजहब वाले से नहीं हो सकता 

( कनुने शरियत जिल्द २, सफा ४९) 

आयत:  अल्लाह रब्बुल इज्ज़त इरशाद फरमाता है : और शिर्क वाली औरतो से निकाह न करो जब तक मुसलमान 

न हो जाये .

मसला: मुसलमान मर्द का मजूसी  (आग की पूजा करने वाले ) बुत परस्त , सूरज पूजने वाली , सितारों को पूजने वाली ,

इन तमाम में से किसी भी औरत से निकाह नहीं होगा 

बहरे शरियत जिल्द 1, हिस्सा नंबर 7, सफा नंबर 17)

आज के इस दौर में अक्सर हमारे मुस्लिम नौजवान कफिरा और मुश्रीकाऔरतो से निकाह करते है 

और निकाह के बाद उन्हें मुसलमान बनाते है, यह निहायत ही गलत तरिका है और शरियत में हराम है .

अव्वल तो निकाह ही नहीं होगा क्योंकि निकाह के वक़्त तक लड़की कुफ्र पर कायिम थी लिहाजा सिरे से 

निकाह ही न हुआ पहले उसे मुसलमान किया जाये फिर निकाह किया जाये .

निकाह किन लोगो से जाईज़ नहीं ?

याद रखिये ,काफिर व मुशरिक औरत को मुसलमान करके निकाह करना जाईज़ तो है लेकिन यह कोई फ़र्ज़ या वाजिब नहीं 

बल्कि कुछ रिवायतो के मुताबिक हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे पसंद भी नहीं फरमाया :

उसकी बहुत सी वजह उलेमाएकिराम ने बयान फरमाई है , जिनमे से चंद यह है,

  1.  जिस नौ मुस्लिम औरत से आपने शादी की अगरचे वह मुसलमान हो गयी उसके सरे मायके वाले काफ़िर है अब चूँकि आपके रिश्तेदार बन चुके है इसलिए आपकी औरत और खुद आपको उनसे ताल्लुकात रखने पड़ते है और फिर आगे  चलकर मुख्तलिफ बुराईया जन्म लेती है और नए नए इख्तालाफत पैदा होते है 
  2. औरत के नौ मुस्लिम होने की वजह से औलादों की तरबियत खालिस इस्लामी ढंग से नहीं हो पाती 
  3. अगर मुसल्मान मर्द काफ़िर लडकियों से निकाह करे तो कुंवारी मुस्लिम लडकियों की तादाद में इजाफा होगा मुस्लिम लडको की किल्लत होने लगेगी और मुस्लिम लडकियों को बड़ी उम्र तक कुंवारा रहना पडेगा और ज्यादा उम्र तक कुंवारी जिंदगी नयी नयी बुराईयों के  जन्म का सबब बनेगी 
  4. दिने इस्लाम में मुश्रीकाना रस्मो का रिवाज़ बढेगा 

इस तरह सैंकड़ो बाते है जिन्हें बयान करना मुमकिन नहीं इसलिए यहाँ मुख़्तसर बाते बयां की गयी है जिन्हें आप आसानी से समझे 

हासिल यह  की कफिरा  और मुश्रिका लड़की या औरत से निकाह नं करे यही बेहतर है इससे दिन व दुनिया का बड़ा नुकसान है 

इसलिए अल्लाह तआला ने जहा मुशरिक औरतो को मुसलमान करके निकाह की इज़ाज़त दी वही मोमिन लौंडी से 

निकाह को ज्यादा बेहतर बताया है बनिस्बत इसके की मुश्रिका व काफिरा औरत से निकाह किया जाए .

निकाह किन लोगो से जाईज़ नहीं ? 

अक्सर मुसलमान लड़के गैर मुस्लिम लड़की से मुहब्बत करते है मुसलमान लड़के से पहले मुहब्बत और फिर शादी 

करने वाली हिन्दू लडकिया अक्सर साथ नहीं निभाती है और ज़रा सी अन बन हो जाने पर ” हिन्दू मुस्लिम ” तफरीक का 

बखेड़ा खडा करने की कोशिश करती है . लेकिन जो औरत या लड़की पहले इस्लाम से मुतास्सिर हुई उसे प्यार 

व मुहब्बत या शादी की कोई लालच नहीं थी और उसे दिने इस्लाम पर कायिम हुए एक अरसा गुजर गया 

एसी लड़की या औरत से जरुर निकाह कर लेना चाहिए ताकि इस्लाम कुबूल करने पर कुवारेपन की सज़ा का ताना उसे 

गैर मुस्लिम न दे .  

Leave a Comment