निकाह के लिए दूल्हा दुल्हन को सजाना

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम 

निकाह के लिए दूल्हा दुल्हन को सजाना | निकाह के अहम् मसाईल | दूल्हा दुल्हन को शादी के वक़्त तैयार करना | निकाह के वक़्त के आदाब | निकाह के वक्त सजने के चंद अहम् मसले 

अस्सलाम अलैकुम दोस्तों जैसा की आपने ऊपर जो पढ़ा है की निकाह के वक़्त दूल्हा दुल्हन को सजाना या फिर उनको तैयार करना तो देखिये इस बात को जां लेना बहुत ही ज्यादा जरुरी है की, हम जब लड़की को निकाह के लिए तैयार करते है सजाते है उस वक़्त उसे हल्दी लगायी जाती है उबटन और खास करके मेहँदी तो जरुर लगायी जाती है दुल्हन तक तो ये बाते ठीक है की मेहँदी लगाना औरत के लिए जीनत है लेकिन क्या दुल्हे को हल्दी मेहँदी लगाना जाएज़ है ?ये बाते हमे मालूम होनी चाहिए की औरत और  मर्द की जीनत उनके हिसाब से काफी अलग है लेकिन आज के दौर में इनमे कुछ लोग फर्क नहीं करते है आईये हम इस मसले को मुख़्तसर में समझाते है 

दूल्हा दुल्हन को सजाने के अहम् मसाईल

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निकाह के मौके पर दुल्हा दुल्हन को सजाना

शादी के मौके पर दुल्हन को मेहँदी लगायी जाती है और आजकल तो दुल्हे को भी लगायी जा रही है , 

कंघन बांधते है, निकाह के दिन सेहरा बांधकर जेवरात से सजाया जाता है. तो इन सबके हिसाब से चंद मसाईल 

जानना या हमे समझना निहायत ही जरुरी है .

मसअला:- औरतो को हाथ पाँव में मेहँदी लगाना  जाईज़ है. क्युकी यह ज़ीनत की चीज़ है लेकिन बिला 

जरुरत छोटे बच्चो के हाथ पैरो में मेहँदी नहीं लगाना चाहिए , लडकियों को हाथ पाँव में मेहँदी लगा 

सकते है जैसे उनको जेवरात पहनते है वेसे. (बहरे शरीयत जिल्द 1, हिस्सा न. 1, हिस्सा न. 16, सफा न. १२९ )

इस मसअला से पता चला की औरते और बड़ी लडकिया मेहँदी लगा सकती है चाहे शादी के मौके पर 

लगाये या किसी और मौके पर .

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दुल्हा दुल्हन को सजाना निकाह के दिन 

हदीस:- सरकारे मदीना सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

“औरतो को चाहिए की हाथ और पाँव पर मेहँदी लगाये ताकि मर्दों के हाथ से मुशाबेह न हो और अगर किसी 

वक़्त बे एहतियाति में किसी गैर मर्द को दिख जाए तो उसे फ़ौरन पता न चलेगा की औरत किस रंग की है .

(यानि कलि है या गोरी) क्योंकि हाथो के रंग को देखकर भी इंसान के चेहरे के रंग का अंदाज़ा हो जाता है.

एक हदीसे पाक में इरशाद है की, ” ज्यादा न हो तो नाख़ून ही रंगीन रखे “

(फतावा रजविया जिल्द 9, निष्फ आखिर सफा नंबर १२९)

लिहाजा औरतो को मेहँदी लगना जाईज़ ही नहीं बल्कि जरुरी है की यह हाथो का पर्दा है .

इसी तरह हर किस्म के चांदी व सोने के जेवरात पहनना भी जाईज़ है . लेकिन मर्दों को मेहँदी लगाना 

और किसी भी धातु का जेवर पहनना हराम है चाहे दुल्हा ही क्यों न हो.

शहजाद-ए-आला हज़रत हुजुर मुफ़्ती आजमें  हिन्द रहमतुल्लाह तआला अलैह के फतावा में है के 

आपसे सवाल पूछा गया :-

सवाल :- दुल्हे को मेहँदी लगाना दुरुस्त है या नहीं ? दुल्हा चांदी के जेवरात पहनता है , कंघन बांधता है,

इस सूरत में निकाह पढ़ा दिया तो दुरुस्त है या नहीं?

जवाब :-(आपने इस सवाल के जवाब में फरमाया ) मर्द के हाथ पाँव में मेहँदी लगाना नाजाइज़ है. 

जेवर पहनना गुनाह है . यह सब चीज़े पहले उतार ली जाये फिर निकाह पढ़ाया जाए की जितनी देर निकाह 

में होगी उतनी देर वो दुल्हा और गुनाह में रहेगा और बुरे काम को कुदरत होते हुए न रोकना और देर 

करना खुद गुनाह है . बाकि अगर जेवर पहने हुए है निकाह हुआ तो निकाह हो जाएगा 

(फतावा मुस्तफिया जिल्द 3, सफा नंबर १७५)

दुल्हा दुल्हन को सजाना 

” हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम के पास  एक हिजड़े को हाजिर किया गया जिसने 

अपने हाथ और पाँव मेहँदी से रंगे  हुए थे हुजुर अलैहिस्सलाम  ने उसे देखकर इरशाद फरमाया 

“इसने मेहँदी क्यों लगायी है ? लोगो ने अर्ज किया “यह औरतो की नक़ल करता है?” सरकारे दो आलम 

सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हुक्म दिया की ” उसे शहर बदर कर दो ” लिहाज़ा उसे शहर 

बदर कर दिया गया. ( अबू दाउद शरीफ जिल्द 3, बाब नंबर ४७७, हदीस न. १४९४ , सफा न. ५४४ )

इमामे अहले सुन्नत आला हज़रत रज़ी अल्लाहु अन्हु “फतावा रजविया ” में फरमाते है :-

” हाथ पाँव में बल्कि नाखुनो में ही मेहँदी लगाना मर्द के लिए हराम है “( फतवा रजविया जिल्द९, 

निस्फ़ आखिर सफा नंबर १४९)

दुल्हा दुल्हन को सजाना 

एक वक़्त का किस्सा है जो हम यहाँ उस किताब के हवाले से बता रहे है जिसके जरिये हम इस पोस्ट को

लिख रहे है आप भी पढ़ सकते है “करीनए जिंदगी” पेज नंबर ६३ 

एक निम् मौलवी साहब में एक बुजुर्गाने दिन के एक अज़ीज़ से कहा की मर्द को मेहँदी लगाना हराम 

जरुर है लेकिन अगर अपने हाथ की छोटी ऊँगली में थोड़ी सी लगा ली तो हरज नहीं ( मआज अल्लाह )

फिर उन्ही बुजुर्ग के इन्ही दोस्त ने जवाब दिया की ” तो फिर कोई कह सकता है की शराब हराम 

जरुर है मगर थोड़ी सी पि ली तो हरज नहीं “

तो दोस्तों जैसा की हमे मालूम हुआ की जीनत जो है वो औरतो के लिए है मेहँदी हल्दी उबटन जेवरात 

वगेराह यहाँ लाली पाउडर और नेल पोलिश की बात नहीं है और न ही ये ज़ीनत में आती है

अल्लाह तआला ने इन कामो से बचने के लिए कहा है नेल पोलिश नाख़ून तराशना और होठो पर लाली 

लगना यह जाएज़ नहीं न ही फेसिअल और चेहरे के बाल को निकालना यह सब जाएज़ नहीं यहाँ बात 

मेहँदी हल्दी और जेवरात की हो रही है जो की अदब में रहकर इस्लामी तरीके से अपने आपको सवारना है 

उम्मीद है आप लोग समझ गए होंगे दोस्तों आप को पोस्ट कैसी लगी हमे कमेंट करके बताईये और

अपने दोस्त अह्म्बाब में हमारी पोस्ट जरुर शयेर करे अल्लाह पाक हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल करने की 

तौफीक अता फरमाए आमीन या रब्बुल आलमीन !

महर का बयान

1 thought on “निकाह के लिए दूल्हा दुल्हन को सजाना”

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