निकाह के लिए लड़की की इज़ाज़त

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम 

इस पोस्ट में हम पढेंगे की, निकाह के लिए लड़की की इज़ाज़त लेना जरुरी है और क्यों? और इस्लाम में लड़की

की इज़ाज़त निकाह के लिए जरुरी है आपने अक्सर देखा होगा, और सूना होगा की, कुछ गैर मुस्लिम लोग

मुसलमानों को ताना देते है की, इस्लाम ने औरतो के साथ नाइंसाफी की है. उन्हें आज़ादी नहीं दी लेकिन

उन कम अक्लो को यह नहीं सूझता की उनके धर्म  ने औरतो के कितने ही हुकुक का बेदर्दी से गला घोटा है.

लेकिन आज के इस दौर में इन गैर लोग आज़ादी का मतलब  कुछ 

इस तरह निकल रहे है की, आधे बदन पर कपड़े फनो, आधे पर नहीं, माँ बाप की बात न मन्ना भी इनकी

नजर में  आज़ादी है, और तो और कम फहम औरतो को सडको, बाजारों, और अपनी झूठी इबादत गाहो में

अध् नंगी हालत में  खुले आम घुमने को ही उनकी आज़ादी समझते है , देखा जाए तो ऐसे एक नहीं कई

और उदाहरन आपके सामने पेश  कर सकते है, बहरहाल साफ़ तौर पर ये जांन  लीजिये की  बेशक

मजहबे  इस्लाम  एसी बेहूदा हरकतों की हरगिज़

इजाजत नहीं देता . वह औरतो को  बाजारों और सडको पर खुले आम अपने हुस्न का मुजाहरा पेश

करने से सख्ती से मना करता है. लेकिन याद रहे वह औरतो को उनके जाईज़ हुकुक देने में कोई कमी

नही नहीं करता और न ही औरतो के साथ बुरा सुलूक करने , उनके साथ जबरदस्ती करने या किसी

किस्म की ना इंसाफी करने की इजाजत देता है वह हर मुआमले में औरतो से बराबरी और इंसानी हुस्ने सुलूक

करने का मर्दों को हुक्म देता है .

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मुसलमान औरतो का पर्दा

निकाह के लिए लड़की की इजाजत

चुनांचे शरियते इस्लामी में जहां कई मुआमले में औरतो की मर्जी जरुरी समझी जाती है वही शादी के लिए

उसकी रजामंदी भी जरुरी है .

हदीस:-  हज़रत अबू हुरैरह व हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ी अल्लाहु तआला अन्हुम से रिवायत है की,

हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

ला तन्केहू लिबिकरी हत्ता तुस्ता मरवरा दा हा सोकुतुहा वला तन्किहशय्यिबा हाता तुस्कानन

कुंवारी का निकाह न किया जाये जब तक उसकी रजामंदी न हासिल कर ली जाए और उसका  चुप रहना

उसकी रजामंदी है और न ही निकाह किया जाए बेवा का जब तक उस से इजाजत न ली जाये .

हदीस:- हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ी अल्लाहु तआला अन्हुमा रिवयात करते है की,

इन्ना इम्रातन तावफ्फा अन्हरू जुहाशुम्मा जहा अम्मू वालादिहा फखाताबाहा फाबिल आबू  अन

युज्नाविजहा  वाज्न्वा जिहा मिनल आखिरी फातत मरअतुननाबियी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम

फाज़ाकारत जालिका लहू फाबाआशा इला आबिहा फाहादारा फाकाला माताकुलो हाजा काला

सादाकत वालाकिन्नी ज्वाआजतहा मिम्मन हुवा खैरन मिनाहू फाफ्र्राकन बैनाहुमा  वाज्व्वा ज़हा

अम्मा वालादिहा .

निकाह के लिए लड़की की इजाजत
निकाह के लिए लड़की की इजाजत

लड़की की रजामंदी

एक औरत के शोहर का इन्तेकाल हो गया उसके देवर ने उसे निकाह का पैगाम भेजा मगर (औरत का बाप )

देवर से निकाह करने पर राज़ी न हुआ, उसने किसी दुसरे मर्द से उस औरत का निकाह कर दिया वह औरत

नाबिए करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की खिदमत में हाजिर हुई और आपसे पूरा किस्सा बयान किया

हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उस औरत के बाप को बुलवाया और उससे आपने  फ़रमाया

“यह औरत क्या कहती है ?” उसने जवाब दिया “सच कहती है मगर मैंने उसका निकाह ऐसे मर्द से किया है

जो उसके देवर से बेहतर है” उस पर हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उस मर्द और

औरत में जुदाई करवा दी और औरत का निकाह उसके देवर कर दिया जिससे वह निकाह करना चाहती थी .

हदीस:- हज़रत मुल्ला अली कारी रहमतुल्लाह अलैह इस हदीस के मुतल्लिक तहरीर फरमाते है:-

“इब्ने कत्तन राज़ी अल्लाहु तआला अन्हु ने कहा है की हज़रत अबने अब्बास  रज़ि अल्लाहु अन्हु कि

ये हदीस सही है, और यह औरत  हज़रत खंसा बिन्ते खुजाम रज़ी अल्लाहु अन्हा थीं. जिसकी हदीस

इमाम मालिक व इमाम बुखारी ने भी नकल की है की उनका निकाह हुजूरे अक्दस सल्लल्लाहु तआला

अलैहि वसल्लम  ने रद्द फरमा दिया था.

निकाह के लिए लड़की की इज़ाज़त 

हदीस:- हज़रत इमाम बुखारी ने अपनी सही हदीस हज़रत खंसा बिन्ते खुजाम रज़ि अल्लाहु अन्हा से इन

अल्फाजो के साथ नकल की है : उनके वालिद ने उनका निकाह कर दिया जबकि वह ऐसे निकाह को

नापसंद करती थी . वह रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की खिद्माते अक्दस  में हाजिर हो गयी

आपने फ़रमाया की “वह निकाह नहीं हुआ ” इन तमान अहादिसे मुबारका से मालूम हुआ की शादी से पहले

कुंवारी लड़की और बेवा से इज़ाज़त लेना जरुरी है और हमारे आका व मौला सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु

तआला अलैहि वसल्लम की बहुत ही प्यारी सुन्नत भी है चुनांचे हदीस पाक में है :

हदीस: हज़रत अबू हुरैराह रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है : नबिए  करीम सल्लल्लाहु  तआला

अलैहि वसल्लम अपनी किसी सहब्जादी को किसी के निकाह में देना चाहते तो उनके पास तशरीफ़ लाते

और फरमाते “फला शख्स (यहाँ उनका नाम लेते ) तुम्हारा जिक्र करता है ” और फिर ( साहाबजादी की रजामंदी

मालूम होने पर )निकाह पढ़ा दिया करते थे.

निकाह के लिए लड़की की इज़ाज़त 

आज देखा जा रहा है की माँ बाप लड़की की मर्जी को कोई अहमियत नहीं देते और अपनी मर्जी के जहा

चाहते है शादी कर देते है अब शादी के बाद अगर लड़की लड़का पसंद आ गया तो ठीक , और अगर

पसंद न आया तो फिर  झगड़ो और ना इत्तेफाकी का एक सैलाब उमड़ पड़ता है और कभी कभी नौबत तलाक तक

आ पहुँचती है.

अपने लखते जिगर के लिए अच्छे लड़के की तलाश करना और फिर उसे विवाह देना यक़ीनन यह माँ बाप

की ही जिम्मेदारी है लेकिन जहा इतनी उठा पाठक करते है वही अगर  लड़की की मर्जी भी मालूम कर ली जाए

तो उसमे भला क्या हर्ज़ है लड़की से  उसकी मर्जी मालूम करनी भी चाहिए क्योंकि उसे ही  सारी  जिंदगी गुजारना  है.

मौजूदा दौर में लड़की की इजाजत को निकाह के वक़्त का एक रस्म बना दिया गया है लड़की को दुलहन

बना दिया गया , सारे मेहमान आ गए अब चार व नाचार उसे हा कहना ही पडेगा . एसा नहीं होना चाहिए

बल्कि निकाह से बहुत पहले खुद इशारों में या किसी रिश्तेदार औरत के जरिये बिलकुल साफ़ साफ़ तौर पर

इजाजत ले ले . अगर लड़की  को खुल कर कहने में झिझक या शर्म महसूस हो रही हो तो दबे लफ्जों में

इज़हार करे यह भी सुन्नत है.

निकाह के लिए लड़की  की इज़ाज़त 

हदीस:- हज़रत इब्ने अब्बास रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है: सरकारे मदीना सल्लल्लाहु तआला

अलैहि वसल्लम ने जब अपनी सहाबजादी हज़रत फातिमा रज़ी अल्लाहू तआला अन्हा  का निकाह हज़रत अली

रज़ियल्लाहू अन्हु से करने का इरादा  फ़रमाया तो आप हज़रत फातिमा के पास तशरीफ़ लाये और इरशाद

फ़रमाया : इन्ना अलियन यज्कुरुके | अली  तुम्हारा जिक्र करते है (यानि तुम्हे निकाह का पैगाम भेजा है )

( मुसनद इमामे आजम बाब नंबर १२२, सफा १२३ )

यह इज़ाज़त हासिल करने का निहायत ही बेहतर तरिका है जो पैगाम के वक़्त जरुरी है . वैसे भी

साफ़ खुले अलफ़ाज़ में पूछना हिजाब व हया के खिलाफ मालूम होता है ऐसे बहुत से अलफ़ाज़ है जो

इजाजत लेते वक़्त दबे लफ्जों में कह सकते है जैसे फला लड़का तुम्हारा जिक्र करता है . फला तुम पर

बहुत मेहेरबान है. फला लड़का तुम्हारे लिए बेहतर है फला को तुम्हारी जरुरत है. फला का पैगाम तुम्हारे लिए

वगेरह वगेरह ( जहां जहा लफ्ज़ फला लिखा है वह लड़के का नाम ले ) निकाह के लिए  लड़की कि इजाजत जरुरी है

इसका साफ़  मकसद यह है की लड़की की जिससे शादी हो रही है उसको वह पहले से जानती भी हो.

और उसे देखा भी हो वरना गैर  मालूम शख्स के बारे  में इजाजत लेना लग्व व  बेकार है .

निकाह के लिए लड़की की इजाजत 

मसला:- लड़की या औरत से इजाजत लेते वक्त जरुरी है की जिसके साथ निकाह का इरादा हो उसका नाम

इस तरह ले की औरत जांन सके अगर यु कहा एक मर्द या लड़के से शादी कर दूंगा या यु फला कौम के एक

शख्स से निकाह कर दूंगा, यह जाएज़ नहीं और यह इजाजत सही भी नहीं |(कनुने शरियत जिल्द २,सफा नंबर ५४)

निकाह के लिए लड़की की इजाजत
निकाह के लिए लड़की की इजाजत

हदीस:- इमाम बुखारी रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु नकल फरमाते है की हज़रत आईशा रज़ी  अल्लाहु तआला अन्हा

ने अर्ज किया की या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ! कुंवारी लड़की तो निकाह की इजाजत

देने में शर्माती है ? इरशाद फरमाया” उसका खामोश हो जाना ही इजाजत है”(बुखारी शरीफ)

यानि किसी लड़के के बारे में कुंवारी से इजाजत ली जाये और वह खामोश रहे तो उसको उसकी रजा समझा

जाएगा . क्यूंकि शर्म की वजह से कुंवारी लड़की खुल्लम खुल्ला “हाँ नहीं करेगी और अगर कोई औरत

मुत्ल्लाका (तलाक शुदा) या बेवा है तो उसका खामोश रहना काफी नहीं बल्कि उसकी जबानी इजाजत

जरूरी है.

निकाह के लिए लड़की की इज़ाज़त 

मसला:- अगर औरत कुंवारी है तो साफ़ साफ़ रजामंदी के अलफ़ाज़ कहे या कोई एसी हरकत करे

जिस से राज़ी होना साफ़ मालूम हो जाये . मसलन मुस्कुरा दे, या हस दे, या फिर इशारे से जाहिर करे .

(कनुने शरियत जिल्द २, सफा नंबर ५४) और अगर इनकार हो तो इस तरह से साफ़ साफ कहे

मुझे उसकी कोई जरुरत नहीं या फिर कहे वो  मेरे लिए बेहतर नहीं वगेरह . जिस तरह भी मुनासिब तौर पर

जाहिर कर सकती हो उस तरह जाहिर कर दे फिर माँ बाप पर भी जरुरी है ज्यादा दबाव न डाले  या जबरदस्ती

न करे बेजा दबाव डालना या जबरदस्ती करना जाईज़ नहीं.

हदीस:- हज़रत अबू हुरैरह रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है की, रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला

अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया : अल्युन्मतो तुस्ता मरुफी नफ्सिहा फाइन सामातत फाहुवा इज्नुहा

वाइन आबात फाला  जावाजा अलैहा .

बालिग़ कुंवारी लड़की से उसके निकाह की इजाजत ली जाये अगर वह खामोश हो जाये तो उसकी

तरफ से इजाजत है  और अगर इंकार करे तो उस पर कोई जबरदस्ती नहीं.

मसला:- बालेगा व आकेला औरत का निकाह बगैर उसकी इजाजत के कोई नहीं कर सकता न उसका बाप

न इस्लामी हुकूमत  का बादशाह . औरत कुंवारी हो या बेवा , इसी तरह बालिग़ व आकिल मर्द का निकाह

बगैर उसकी मर्जी के कोई नहीं कर सकता (कनुने शरीयत जिल्द २, सफा नंबर ५४)

निकाह के लिए लड़की की इज़ाज़त 

मसला:- कुंवारी लड़की का निकाह या लड़के का निकाह उनकी इजाजत के बगैर कर दिया गया और उन्हें

निकाह की खबर दी गयी तो औरत चुप रही या हसी या बगैर आवाज़ के रोई तो  निकाह मंजूर समझा जाएगा

इसी तरह मर्द ने इनकार न किया तो निकाह मंजूर समझा जाएगा लेकिन मर्द या औरत में से किसी एक

ने भी इंकार कर दिया तो निकाह टूट गया (फतावा रजविया जिल्द 5, सफा नंबर १०४, कनुने शरियत जिल्द २,

सफा नंबर ५४ )

यह तमाम शरई मसाईल है जिनका जानना और उन पर अमल करना जरुरी है जिसमे माँ बाप की भी

जिम्मेदारी है की वह अपनी औलाद की ख़ुशी का ख्याल रखे और औलाद  का भी फ़र्ज़ है की वह माँ बाप और

घर के दीगर बुजुर्गो का कहा माने वह जहा शादी कराना चाहे उनकी रजामंदी में ही अपनी रजा समझे की माँ

बाप कभी भी अपनी औलाद का  बुरा नहीं चाहते

निकाह के लिए लड़की की  इज़ाज़त 

हदीस :- हज़रत अबू हुरैरह रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु ने से रिवायत है की, नबिए  करीम सल्लल्लाहु तआला

अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :- लता ज्व्वाजल मरआतूल मरआता वलाताज्व्वाजल मरआतो  नफ्साहा 

फ़ाइन्नज्जानियाता हियल्लती  ताज्व्वाजा  नफ्साहा .

कोई औरत दूसरी औरत का निकाह न करे और न कोई औरत अपना निकाह  खुद करे .  क्योंकि जानिया 

(जीना करने  वाली ) वही है जो अपना निकाह खुद करती है .

मसअला :- बालिग़ लड़की ने वली ( माँ बाप वगेरह ) की इजाजत के बगैर खुद अपना निकाह छुप कर 

या एलानिया किया तो  उसके जाएज़ होने के लिए यह शर्त  है की शोहर उसका कुफ्व हो . यानि मजहब , 

खानदान या पेशे या माल या चाल चलन में औरत से एसा कम न हो की उसके साथ उसका निकाह होना 

लड़की के माँ बाप व खानदान वालो और दीगर रिश्तेदारों के लिए बेईज्ज़ती व शर्मिंदगी व बदनामी का सबब 

हो अगर एसा है तो वह निकाह न होगा (फतवा रजविया , जिल्द 5, सफा नंबर १४२ )

मसअला :- शादी की तारीख  लेते वक़्त दुलहन के अय्यामे हैज से बचने के लिए उसकी रजा ले ली जाए 

यह उन इलाको में निहायत जरुरी है जहा निकाह के बाद उसी दिन या एक दिन बाद रुखसती होती है. 

 

 

निकाह का पैगाम

निकाह कहा करे ?

 

 

 

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