निकाह क्यों जरुरी है ?

बिस्मिल्लाहहिर्रहमाननिर्रहीम

निकाह क्यों जरुरी है?  

अस्स्लामालाकुम दोस्तों आज की ये पोस्ट सभी बालिग औरत मर्दों के लिए जरुरी है इसलिए की निकाह करना हमारी ज़िन्दगी का एक बेहद जरुरी  हिस्सा है जिसे करने से पहले आपको जांनं लेना जरुरी है की निकाह क्यों जरुरी है ? और निकाह के कुछ मसले भी है जिन्हें  आने वाली पोस्ट में भी पढेंगे उम्मीद करती हु आपको हिस्से इससे  जानकारी  हासिल होगी निकाह क्यों जरुरी है? 

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नहमदुहू व नुसल्ली अला रसुलेहिल  करीम अम्मा बाद | 

आयत :- अल्लाह रब्बुल इज्जत इरशाद फरमाता है :

फंकेहू माताबा लकुम मिनन्ननेसाई अलख | ( पारा 4 ,सूरा निसा , रुकुअ 12, आयत 3)

तर्जमा :- तो निकाह में लाओ जो तुम्हे खुश आये |(तर्जुमा कन्जुल ईमान ) 

हदीस:- नुरे मुजस्सम , फ़खरे दो आलम , रसूले अकरम , फ़खरे बनी आदम , मालिके दो जहा , हबिबे किब्रिया ,

खातमूल-अम्बिया  ताजदारे मदीना , नबीए रहमत, शाफ-ए-महशर, अह्मदे मुजतबा मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु

तबारक व तआला अलैहि व आलेही व अज्वाजेही व असहाबेही व बारीक़ व सल्लिम ने इरशाद फ़रमाया :

अन्निकाहू  मीन सुन्नती (इब्ने माजा जिल्द 1,बाब नंबर ५८९, हदिस नंबर १९१३, सफ: नंबर ५१८)

तरजमा:- निकाह मेरी सुन्नत है |

हदीस:- फरमाते है हमारे प्यारे  मदनी आका  सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम  |

हदीस :- बन्दे ने जब निकाह कर लिया तो आधा दिन मुकम्मल हो जाता है , अब बाकि आधे के लिए अल्लाह 

तआला से डरे |(मिश्कात शरीफ) 

हदीस:-हज़रत अब्दुल्लाह बिन  मसउद रजी अल्लाहु  तआला अन्हु से रिवायत है की सरकारे मदीना 

सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया :

तर्जमा:– ए जवानो! जो तुम में से औरतो के हक़  अदा करने की ताकत रखता है तो वह जरुर निकाह करे 

क्यूंकि यह निगाह को झुकाता और शर्मगाह की हिफाज़त करता है और जो उसकी ताक़त न रखे वह 

रोज़ा रखे क्यूंकि यह शहवत को कम करता है (बुखारी शरीफ)

निकाह क्यों जरुरी है ?

मसला:- एतदाल की हालत में यानि न शहवत का बहुत ज्यादा गलबा हो न इन्नींन (नामर्द ) हो और महर

व नांन नफका पर कुदरत भी हो तो निकाह करना सुन्नते मुक्कादा है की निकाह न करने पर अड़ा रहना 

गुनाह है |

मसलाः– शहवत का गलबा ज्यादा है और मआज़ल्लाहं  अंदेशा है की, जीना हो जाएगा और बीवी का महर 

और नान न्फ्का देने की कुदरत रखता है तो निकाह करना वाजिब है | यु ही जब की अजनबी औरत की 

निगाह उठने से रोक नहीं सकता या  माजल्लाह हाथ से काम लेना पड़ेगा तो निकाह करना वाजिब है |

मस्ला:- यह यकीं हो की निकाह न करने से जीना वाके हो जाएगा तो एसी हालत में निकाह करना फ़र्ज़ है .

मसला- अगर यह अन्देशा है की निकाह करेगा तो नांन व नफका  न दे सकेगा तो एसी हालत में निकाह करना 

फ़र्ज़ है .

मसला:- अगर यह अंदेशा हो की निकाह करेगा तो नान व नफका न दे सकेगा या जो जरुरी बाते है उनको पूरा 

न कर सकेगा तो निकाह करना मकरूह है |

मसला:- यकीं है की नान व नफका नहीं दे सकेगा तो एसी हालत में निकाह करना हराम है 

(मगर बहरहाल निकाह किया तो हो जाएगा ) 

(बहारे शरियत ,जिल्द१, हिस्सा नंबर 7, सफह नंबर 6, कानून ए शरियत , जिल्द २, सफा नंबर ४४)

 दोस्तों यह पोस्ट को आगे भी हम जारी रख्नेगे और इस टॉपिक में अभी बहुर कुछ है इसलिए अगली पोस्ट की लिंक में इसी पोस्ट में दूंगी आप जरुर पढ़िए अल्लाह पाक हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाए अमिन या रब्बुल आलमीन !

 हज़रत अली की बाते

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