निकाह से पहले लड़की देखना

बिस्मिल्ल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम 

लड़का लड़की एक दुसरे को देख सकते है क्या ?

निकाह से पहले लड़की को देखना  लड़की या औरत को किसी गैर मर्द को उस वक़्त दिखने में हरज नहीं जब वह उससे शादी का

इरादा रखता हो या उसने उसे शादी का पैगाम भेजा हो . लेकिन लड़के के दुसरे मर्द या रिश्तेदारों या

दोस्तों को नहीं दिखाना चाहिए. की वह सब गैर महरम है ( जिन से लड़की का पर्दा करना जरुरी है )

लिहाजा सिर्फ लड़का और उसकी घर की औरत ही लड़की को देखे.

निकाह का पैगाम

निकाह कहा करे ?

यानि निकाह से पहले औरत को देखना मुस्तहब है लेकिन इस बात का जरुर ख़याल रखे की लड़के को

लड़की इस तरह दिखाए की लड़की को इस बात की भनक भी न लगे की लड़का उसको देख रहा है .

(यानि खुल्लम खुल्ला सामने न लाये ) अगर इस एहतियात से दिखाया जाये तो उसमे कोई हरज नहीं .

बल्कि बेहतर है की बाद में किसी किस्म कि गलत फहमी नहीं होती.

निकाह से पहले लड़की देखना
निकाह से पहले लड़की देखना

शादी से पहले औरत या लड़की को देखना केसा

हदीस:- हज़रत मुहम्मद बिन सलमा रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है:-

” मैंने एक औरत को निकाह का पैगाम दिया , मई उसे देखने के लिए उसके बाग़ में छुपकर जाया करता था .

यहाँ तक की मैंने उसे देख लिया , किसी ने कहा आप एसी हरकत क्यों करते है हलाकि आप ,

हुजुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के सहाबी है? तो मैंने उसे जवाब दिया की रसूल अल्लाह

सल्लाल्ल्हू तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया की, “जब अल्लाह तआला किसी के दिल में

किसी औरत से निकाह की ख्वाहिश डाले और वह उसे पैगाम दे तो उसकी जानिब देखने में कोई

हर्ज़ नहीं” ( इब्ने माजा शरीफ जिल्द, 1, बाब नंबर ५९७, हदीस नंबर १९३१, सफा नंबर ५२३).

हदीस:- हज़रत जाबिर राजिअल्लाहू तआला अन्हु से रिवायत है की, हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु  तआला अलैहि

वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया :”आजा खाताबा अहदुकुमुल मर आता फालेनिस ताताआ  अंइ यंजोरा एला

माँ’यद् ओहू इला निकाइहा फलयफअल”

“जब तुम में से कोई किसी औरत को निकाह का पैगाम दे तो अगर उस औरत को देखना मुमकिन

हो तो देख ले”

हज़रत सैय्य्दना  इमाम बुखारी रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु ने अपनी ,मशहूर किताब सहीह बुखारी

“किताबुन्निकाह” में निकाह से पहले औरत को देखने के मुतल्लिक एक ख़ास बाब कायिम किया है

जिसका नाम “अन्नजुरु इलल-मरअते कब्लतरविज़” यानि निकाह से पहले औरत को देखना है .

इस बाब में इमाम बुखारी ने कई हदीसे लायी है , जिनसे साबित होता है की निकाह से पहले औरत को देखना

जाईज़ है.

निकाह से पहले लड़की देखना

चुनांचे इस बात की एक लम्बी हदीस में है जिसका खुलासा यह है :

हदीस: हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की खिदमते अक्दस में एक मरतबा एक सहाबिया

खातून हाजिर हुई और आप से निकाह की दरख्वास्त की , लेकिन हुजुर अलैहिस्सलाम ने अपना सर

मुबारक झुका लिया और उन्हें कुछ जवाब नहीं दिया. एक सहाबी ने खड़े होकर अर्ज़ किया या रसूल अल्लाह !

अगर आप उस औरत से निकाह नहीं करना चाहते है तो  उसका निकाह मेरे साथ फरमा दीजिये ! सरकार

सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के उनसे  पूछने पर मालूम हुआ की उनके पास मुफलिसी की वजह से

कुछ  रुपये, पैसे कपड़ा वगेरह नहीं यहाँ तक की महर अदा करने के लिए एक अंगूठी तक नहीं है.

अलबत्ता कुरआन की कुछ सूरते याद है चुनांचे हुजुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने  उनके कुराने करीम

जानने के सबब उस सहबिया खातून का निकाह उस सहाबी से फरमा दिया .

(बुखारी शरीफ जिल्द 3, बाब नंबर ६५, हदीस नंबर ११३, सफा नंबर ७१)

निकाह से पहले लड़की देखना 

उलमा-ए-किराम फरमाते है की यह खुसुसियात उन्ही सहाबी के लिए मखसूस थी. और रसूल अल्लाह 

सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के बाद एसा करने का किसी को हक़ नहीं है , क्योंकि अल्लाह के 

रसूल का हुक्म खुद शरियत है. आज इस तरह से निकाह करना जाएज़ नहीं. 

( अबू दाउद शरीफ जिल्द २, बाब नंबर १०८, सफा नंबर १३२ )

हदीस:- इसी तरह की दूसरी हदीस है:

“रसूले अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को ख्वाब में हज़रत आईशा सिद्दीका रज़ी अल्लाहु तआला अन्हा 

को निकाह से पहले दिखाया गया (बुखारी शरीफ जिल्द 3, बाब नंबर ६५, हदीस नंबर ११२, सफा ७१)

इन हदीसो से इमाम बुखारी ने यह साबित किया है की औरत को निकाह से पहले देखना जाईज़ है. 

हुज्जतुल-इस्लाम सय्य्दना मुहम्मद गजाली रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है:-

“निकाह से पसले औरत को  देख लेना हज़रत इमाम शाफ़ई रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु के नजदीक सुन्नत है “

(कीमिया-ए- सआदत  सफा नंबर २६०) 

यही इमाम गजाली रज़ी अल्लाहु  तआला अन्हु आगे नक़ल फरमाते है :” औरत का जमाल मुहब्बत व उल्फत 

का जरिया  है इसलिए निकाह करने से पहले लड़की को देख लेना सुन्नत है . बुजुर्गो का कहना है की औरत को 

बेदेखे जो निकाह होता है उसका अंजाम परशानी और गम है” (कीमिया-ए-सआदत , सफा नंबर २६० )

निकाह से पहले  लड़की देखना 

हुजुर सैय्यदना गौसुल-आज़म शैख़ अब्दुल-कादिर जिलानी रज़ी अल्लाहु अन्हु अपनी तस्नीफ़ “गुनयतुत्तालेबिन “

में इरशाद फरमाते है,” मुनासिब है की निकाह से पहले औरत का चेहरा और जाहिरी बदन यानि हाथ, मुंह, 

वगेरह देख ले , ताकि बाद में नफरत या तलाक़ की नौबत न आये क्यूंकि ,तलाक और नफ़रत अल्लाह तआला 

की सख्त नापसंद है “(गुनयतुत्तालेबिन , बाब नंबर 5, सफा नंबर ११२)

 

हज़रत उम्मे सलमा रज़ियल्लाहू अन्हा

वहाबियो से निकाह करना कैसा ?

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