माहवारी (हैज़) का बयान

अस्सलाम अलैकुम  आज की इस पोस्ट में हम माहवारी (हैज़) का बयान पढेंगे जो भी मसला हो आप इस पोस्ट को पढ़कर जानकारी हासिल कर सकते है हमारी बहने जो भी कुछ हया की वजह से जानकारी नहीं हासिल कर पातीं हैं उनके लिए भी इस मसले पर जानकारी के लिए इस पोस्ट में काफी लिखा गया है उम्मीद है मेरी बहनों को इससे मदत होगी और जो भी मसले आते है उनके जवाबात भी मिल्नेगे हालते हैज़ में क्या करे क्या न करे इसके बारे में भी बात करेंगे 

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शबे जुफाफ (सुहागरात ) के आदाब

जरुरी मालूमात हालते हैज़ 

आयात :- अल्लाह रब्बुल इज्जत इरशाद फरमाता है : और (ऐ महबूब ) तुम से पूछते है हैज़ का हुक्म, 

तुम फरमाओ वह नापाकी है (सुरह बकरा तर्जुमा कन्जुल ईमान )

बालेगा औरत के बदन में आदत के मुताबिक जरुरत से कुछ ज्यादा खून पैदा होता है की हमल की

हालत में वह खून बच्चे की गिजा में काम आये और बच्चे के दूध पिने के ज़माने में वही खून

दूध हो जाए अगर एसा न हो तो हमल और दूध पिलाने के ज़माने में औरत की जांन पर बन

आये यही वजह है की, हमल और दूध पिलाने की शुरुआत में खून नहीं आता जिस जमाना में हमल

न हो और न दूध पिलाना हो  तो अगर वह खून बदन से न निकले तो किस्म किस्म की

बीमारिया हो जायेंगी .

बालेगा लड़की  के आगे के मकाम से जो खून  आदत के मुताबिक निकलता है उसे हैज़

(माहवारी पीरियड्स ) कहते है. लडकी को जिस उमर से खून आना शुरू हो जाए तो शरई रू से

वह उस वक़्त से बालिग समझी जाएगी

माहवारी (हैज़) का बयान
माहवारी (हैज़) का बयान

माहवारी (हैज़) का बयान 

मसला:- हैज़ की मुद्दत कम से कम तिन दिन और तिन राते है , यानि ओउरे बहत्तर घंटे एक मिनट 

भी अगर कम है तो हैज़ नहीं और ज्यादा से ज्यादा दस दिन और दस राते है 

( बहारे शरियत जिल्द१, हिस्सा नं. २, सफा नं. ४२, कानुने शरियत जिल्द 1,  सफा नं. ५१ )

मसला:- यह जरुरी नहीं की मुद्दत में हर वक़्त खून जारी रहे , बल्कि अगर कुछ कुछ वक़्त आये 

जब भी हैज़ है ( बहारे शरियत जिल्द 1, हिस्सा नं. २, सफा नं. ४२ )

मसला:- हैज़ में जो खून आता है उसके छ रंग होते है काला , लाल, हरा, पिला, गदला, 

(कीचड़ के रंग जैसा ), और मटीला (मिटटी के रंग जैसा ) उन रंगों में से किसी भी रंग का खून 

आये तो हैज़ है , सफ़ेद रंग की रत्बुत ( गीलापन ) हैज़ नहीं ( बहारे शरियत जिल्द 1, 

हिस्सा नं. 4, सफा नं. ४३, कानुने शरियत जिल्द 1, सफा नं. ५२ )

माहवारी (हैज़) का बयान 

मसला:- हैज़ और निफास ( निफास का बयान भी आगे की पोस्ट में आपको मिल जाएगा )

की हालत में कुराने करीम छूना, देखकर या जुबानी पढ़ना , नमाज़ पढ़ना , दिनी किताबो को छूना 

यह सब हराम है लेकिन, दुरुद शरीफ वगेराह पढने में कोई हरज नहीं 

( बहारे शरियत जिल्द 1, हिस्सा नं. २, सफा नं. ४६ )

मसला:- हालते हैज़ में औरत को नमाज़ माफ़ है रमजान शरीफ के रोजे हालते हैज़ में न रखे 

लेकिन हैज़ से फरागत के बाद जितने रोजे छूटे है उन सब की क़ज़ा रखना जरुरी है 

(फतावा मुस्ताफ्विया , जिल्द २, सफा नं 13, कानुने शरियत जिल्द 1, सफा नं. ४६)

 

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