मुकद्दस कातिल

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम इस पोस्ट में हम सच्ची हिकायत में मुकद्दस कातिल का वाकिया पढेंगे , इन वाकियात को आप अपने बच्चो को सिखा सकते है और कहानियो की जगह सच्ची  हिकायते बता सकते है जो की सही वाकियात है इससे बच्चो को जहानी तौर पर अच्छी सिख भी मिलेगी और बुजुर्गाने दिन के बारे में जानकारी उनकी उम्र के मुताबिक हासिल होगी तो पढ़ते है सच्ची हिकायत में मुकद्दस कातिल का वाकिया आखिर वो कातिल मुकद्दस क्यों कहलाया ?

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Mukaddas Qaatil | सच्ची हिकायत

मक्का मोअज्जमा में एक काफिर था जिसका नाम वलीद था वो रहता था , उसके पास एक बुत था 

जिसकी वो पूजा किया करता था. एक दिन उस बुत में कुछ हलचल हुई यानि उसमे कुछ  हरकत हुई

और वो बुत बोलने लगा . उस बुत ने कहा “लोगो ! मोहम्मद अल्लाह का रसूल नहीं है , उसकी हरगिज़

तस्दीक ना करना “(मआज अल्लाह)  . वलीद इस बात से बड़ा खुश हुआ, और बाहर निकल कर अपने

लोगो  से कहने लगा , मुबारकबाद आज मेरा माबूद बोला है और साफ़ साफ़ उसने कहा है की ,

मोहम्मद अल्लाह का रसूल नहीं है (मआज अल्लाह ), ये सुनकर लोग लोग उसके घर आये तो देखा

की वाकई उसका बुत ये जुमले दोहरा रहा है वो लोग भी बहुत खुश हुए . और दुसरे दिन एक आम

एलान के जरिये वलीद के घर में बहुत बड़ा इज्तेमा हुआ ताकि उस दिन भी लोग बुत के मुंह से

वही जुमला सुने.

मुकद्दस कातिल
मुकद्दस कातिल

मुकद्दस कातिल

जब इज्तेमा हो गया तो उन लोगो ने हुजुर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम आपको भी दावत दी

ताकि हुजुर अलैहिस्सलाम खुद भी तशरीफ़ लाकर बुत के मुंह से वही बकवास सुन जाएँ , चुनाचे

हुजुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम भी तशरीफ़ ले आये , जब हुजुर अलैहिस्सलाम

तशरीफ़ ले आये तो बुत बोल उठा ” ऐ मक्का वालो ! खूब जां लो की मोहम्मद अल्लाह के

सच्चे रसूल है उनका हर इरशाद सच्चा है और उनका दिन बरहक है तुम और तुम्हारे बुत झूठे,

गुमराह, और गुमराह करने वाले है अगर तुम इस सच्चे रसूल पर ईमान ना लाओगे तो जहन्नम में

जाओगे  पस अक्लमंदी से काम लो,और इस सच्चे रसूल की गुलामी इख्तोयार कर लो “

बुत की ये आवाज़ सुन कर वलीद बड़ा घबराया और ओने माबूद को पकड़कर ज़मीं पर

दे मारा और उसको टुकड़े टुकड़े कर दिया .

मुक़द्दस कातिल

हुजुर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व सल्लम फातिहाना तौर पर वापिस हुए तो रास्ते में एक घोड़े सवार

जो सब्ज पोश था हुजुर अलैहिस्सलाम से मिला उसके हाथ में तलवार थी जिससे खून बह रहा था .

हुजुर अलैहिस्सलाम ने फरमाया तुम कौन हो ? वो बोला हुजुर ! मै जिन हूँ और आपका गुलाम हु और

मुसलमान हु , जबले तुर पर रहता हूँ मेरा नाम महीन बिन अल एबर है ऐसा, मै कुछ दिनों के लिए कही बहार

गया हुआ था . आज घर वापिस आया तो मेरे घर वाले रो रहे थे , मैंने वजह दरयाफ्त की तो मालूम हुआ

की  एक काफ़िर जिसका नाम मुसफ्फर था वो मक्का में आकर वलीद के बुत में घुसकर आपके मुतल्लिक

बकवास करे या रसूल अल्लाह ! मुझे सख्त गुस्सा आया , मै तलवार लेकर उसके पीछे दौड़ा और उसे

रास्ते में ही कत्ल कर दिया और फिर मै खुद वलीद के बुत में घुस गया और आज जिस कद्र तकरीर की है

मैंने ही की है या रसूल अल्लाह !

हुजुर अलैहिस्सलाम ने यह किस्सा सूना तो आपने बड़ी मुसर्रत का इजहार किया और उस अपने गुलाम

जिन्न के लिए दुआ फरमाई (जाम ( अल मौजज्जात सफा नं. 7 )

सबक :-

हमारे हुजुर अलैहिस्सलाम जिन्नों के भी रसूल है और हुजुर सल्लल्लाहो अलैह व सल्लम की सहने पाक

के खिलाफ  सुनने सुनाने के लिए कोई जलसा करना ये वलिद जैसे काफिर का काम है

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