रोज़े अशुरा की फ़ज़ीलत

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ” अल्लाह के नाम से शुरू जो बड़ा ही मेहरबान व रहम वाला है “

हमे रोज ए अशुरा को यानि अशुरा के दिन क्या करना चाहिए और सबसे बड़ी बात रोज़े अशुरा ? यौम ए अशुरा के दीन की फ़ज़ीलत क्या है आपको क्या क्या करना चाहिए और इस मुबारक दिन की  मुख़्तसर फज़िलाते निचे दी गयी है 

आप पढ़े औरो को भी शेयर करे और रोज़े अशुरा के दिन अच्छे अमाल करके अल्लाह पाक से दुवा मांगे .

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यौम एअशुरा की फ़ज़ीलत 

मुहर्रम की दसवी तारीख जिसका नाम ” रोज़े अशुरा” है, दुनिया की तारीख में यह बड़ा ही अजमत व 

फ़ज़ीलत वाला दिन है. यही वह दी है की इसमें हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा काबुल हुई .

इसी दिन हज़रत नुह अलैहिस्सलाम की कश्ती  तूफ़ान में  सलामती के साथ “जुदी” पहाड़ पर पहुंची. 

इसी दिन हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की विलादत हुई. और इसी दिन आपको “खलिलुल्लाह”  का 

लकब मिला. और इसी दिन आपने नमरूद की आग से नजात पायी. 

यही वह दिन है की हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम को सल्तनत मिली. यही वह दिन है की 

जिस दिन हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की बलाए खत्म हुई. यही वह दिन की , हज़रत इदरिस अलैहिस्सलाम 

व हज़रत इसा अलैहिस्सलाम आसमानो पर उठाये गए. यही वह दिन है की बनी  इसराइल के लिए 

दरिया फट गया, और फिरौंन लश्कर समेत दरिया में डूब के गर्क हो गया. और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को

फिरौंन से नजात मिली. इसी दिन हज़रत युनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट से जिंदा व सलामत बाहर 

तशरीफ़ लाये. इसी दिन हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियो ने मैदाने कर्बला में 

शहादत नोश फरमाकर हक़ के झंडे को सर-बुलंद फरमाया (सावी व गुनियातुत्तालिबिंन )

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रोज़े अशुरा की फ़ज़ीलत 

शबे अशुरा की नफ्ल नमाज़ :- अशुरा की रात में चार रकआत  नमाज़ नफ्ल इस तरकीब से पढ़े की,

हर रकात में अलहम्दु के बाद आयतलकुर्सी  एक बार और सुरह इखलास (कुल्हुवाल्लाहू अहद) तीन तीन बार पढ़े 

और नमाज़ से फारिग होकर एक सौ मरतबा कुल हुवाल्लाह की सुरह पढ़े . 

गुनाहों से पाक होगा और ज़न्नत में बेंतेहा नेअमते मिलेंगी . (फजाइलुश्शुहुर  वास्सियम )

अशुरा का रोज़ा :- नौवी और दसवी मुहर्रम दोनों दिन रोज़ा रखना चाहिए और अगर न हो सके तो  अशुरा के ही दिन 

रोज़ा रखे . इस रोज़े का सवाब बहुत बड़ा है .(मुस्लिम शरीफ)

आशूरा के दिन दस चीजों को उलमा ने मुस्तहब लिखा है . बाज़  आलिमो ने इनको इर्शदे नबवी कहा है 

और बाज़ ने हज़रत अली रज़ियल्लाहू अन्हु का कौल बताया है. बहरहाल यह सब अच्छे आमल है लिहाज़ा 

इनको करना चाहिए.

  1. रोज़ा रखना २) सदका करना 3) नमाज़े नफ्ल पढना 4) एक हज़ार मरतबा कुल हुवल्लाह  पढ़ना
  2. 5) उलमा की जियारत करना 6) यतीम के सर पर हाथ फेरना 7) अपने बाल बच्चो के रिजक में वुसअत करना 
  3. 8) गुसल करना 9) सुरमा लगाना 10) नाख़ून तराशना 

और बाज़ किताबो में लिखा है की इन दस चीजों के अलावा और तीन चीज़े भी मुस्तहब है – 

  1. मरीजों की बिमारपुरसी २. दुश्मनो से मिलाप 3. दुआए आशुरा पढ़ना 

रोज़े अशुरा की फ़ज़ीलत 

हजरत अब्दुल्लाह बिन मसउद सहाबी राज़ियाल्लाहू अन्हु कहते है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 

फरमाया है की जो शख्स आशुरा के दिन अपने बाल बच्चो  के खाने पिने में खूब ज्यादा फराखी और 

कुशादगी करेगा यानि ज्यादा खाना तैयार कर खूब पेट भर के खिलायेगा अल्लाह तआला साल भर तक 

उसके रिजक में वुसअत  और खैर व बरकत अता फरमाएगा (मा सबत  मिन्सुन्नाह )

मज़लिसे मुहर्रम :- अशरए  मुहर्रम ख़ास तौर से दसवी मुहर्रम अशुरा के दिन मजलिस मुनअकिद  करना ,और 

सही रिवायतो के साथ शोहदए करबला राज़ियाल्लाहू अन्हुम के फ़ज़ाएल  व वाकिआते करबला

को बयान करना जाएज़ और सवाब का सबब है. हदीस शरीफ में आया है की जिन मजलिस में 

सालिहींन का ज़िक्र हो वह रहमत नाजिल होती है फिर चूँकि उन वाकियात में सब्र व तहम्मुल 

और तस्लीम व रजा पाबन्दिए शरीअत का बे मिसाल अमली नमूना भी है.  इस लिए करबला के वाकियात

को बार बार बयान करने से मुसलमानों को दिन पर इस्तेकामात हासिल होगी जो इस्लाम का इत्र और 

ईमान की रुंह है. हाँ मगर इसका ख्याल रखे कि इन मजलिसो में सहाबये किराम राज़ियाल्लाहू अन्हुम क भी 

जिक्रे खैर होना चाहिए ताकि अहले सुन्नत और  शिआओ की मजलिसो में फर्क व इम्तियाज़ रहे 

(बहरे शरीअत )

 हज़रत अली कोट्स

शिकवा

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