निकाह किस से करे ?

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम 

अस्सलाम अलैकुम दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम बहुत ही जरुरी मालूमात हासिल करने वाले है और इस बारे में आपको और हर एक सुन्नी सहिउल अकीदा मुसलमान को ये जानना जरुरी है की निकाह कहा करे और  वहाबियो से निकाह करना केसा? है क्या हम वहाबियो से निकाह कर सकते है उनसे रिश्तेदारी कर सकते हे या नहीं और क्यों ?

निकाह किन लोगो से जाईज़ नहीं ?

निकाह क्यों जरुरी है ?

हर सवाल का जवाब आपको इस पोस्ट में जरुरु मिलेगा और आपको यह जानकारी होनी ही चाहिए की वहाबियो से निकाह करना कैसा है?

निकाह किस से करे ?

निकाह किस से करे ?
निकाह किस से करे ?

वहाबियो से निकाह करने के मुतल्लिक इमामे इश्क व मुहब्बत , अजीमुल बरकत, बाला मंजिलत , मुज्द्दीदे दिन व मिल्लत,

आला हज़रत अश्शाह इमाम अहमद रजा कादरी रहमतुल्लाह अलैह अपनी मल्फुजात में इरशाद फरमाते है :

सुन्नी मर्द या औरत का राफजी, वहाबी, देवबंदी, नेचरी,  कादियानी,  चकडालवी, जितने जुमला , मुरतदीन  है उनके मर्द या औरत से

निकाह नहीं होगा. अगर निकाह किया तो निकाह न होकर जीना खालिस होगा और औलाद वल्दुज्जना  (जीना से पैदाशुदा )

कहलाएगी . फतवा आलमगिरी में है:

निकाह किस से करे ?
निकाह किस से करे ?

कसार हमारे कुछ कम अक्ल न समझ  सुन्नी मुसलमान  जिन्हें दिन की मालूमात व अपने ईमान की अहमियत

मालूम नहीं होती वह वह्बियो से आपस में रिश्ते  जोड़ते है, जाहिलियत की वजह से दिनी मालूमात को छोड़कर

और नादानी में लोगो की बातो में आकर अपनी बटे बेटियों के निकाह इनसे जोड़ देते है , हलाकि कुछ बदनसीब सब कुछ

जानने के बावजूद भी वहाबियो से आपस में रिश्ते कायेम रखते है.

सुन्नियो का वहाबियो से रिश्ता  करना कैसा है? 

कुछ सुन्नी हजरात ख्याल करते है की वहाबी अकीदे की लड़की अपने घर निकाह करके ले आओ फिर वो हमारे 

माहौल में रहकर खुदबखुद सुन्नी हो जाएगी , अव्वल तो यह की ये निकाह नहीं होता क्यूंकि जिस वक़्त  निकाह

हो उस वक़्त लड़का सुन्नी ओर लड़की वहाबी अकीदे पर कायिम थी लिहाज़ा सिरे से निकाह ही नहीं हुआ .

सैंकड़ो जगहों यह देखा गया है की किसी सुन्नी ने वहाबी घराने में यह सोच कर रिश्ता किया की हम किसी तरह 

समझा बुझा कर अपने माहौल में रखकर उन्हें वहाबी से सुन्नी सहिउल अकीदा बना देंगे लेकिन वह समझा कर सुन्नी 

बना पाते इससे पहले ही उन वहाबी रिश्तेदारों ने उन्हें ही कुछ ज्यादा समझा दिया और अपना हम ख्याल 

बनाकर मआज अल्लाह सुन्नी से वहाबी बना डाला और इन सब में साडी उनकी होशियारी धरी कि धरी रह गई .

और दिन व दुनिया दोनो ही बर्बाद हो गए .

वहाबियो से निकाह करना कैसा ?

यह बात हमेशा याद रखिये की ऐसे शख्स को  समझाया जा सकता है  जो वहाबियो के बारे में हकीक़त से जानकारी 

नहीं रखता लेकिन ऐसे शख्स को समझा पाना मुश्किल है जो सब कुछ जानता और समझता है . उलमा-ए-देवबंद 

गैर-मुकल्लेदीन वहाबियो की हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, अम्बिये किराम, बुजुर्गाने दिन की

शाने अक्दस में गुस्ताखियों को समझता है ,उनकी किताबो में वो सब गुस्ताखाना इबारतो को पढता है लेकिन इन 

सबके बावजूद यही कहता है की यह (वहाबी) तो बड़े अच्छी लोग है उन्हें बुरा नहीं कहना चाहिए 

ऐसे लोगो को समझा पाना मुश्किल है .

आयत : अल्लाह तआला ऐसे ही लोगो के मुतल्लिक  इरशाद फरमाता है:

निकाह किस से करे ?
निकाह किस से करे ?

अल्लाह ने उनके दिलो पर और कानो पर मुहर कर दी और उनकी आँखों आर घटा टोप है और उनके लिए 

बड़ा अज़ाब है (सुरह बकरा आयत – 7 कन्जुल ईमान )

लिहजा जरुरी है की ऐसे लोगो से की जिनके दिलो पर अल्लाह तआला ने मुहर लगा दी हो उन से रिश्ते कायिम 

न किये जाए वरना शादी, शादी न हो कर जिनाकारी रह जायेगी. 

तर्जमा: अल्हुम्दुल्लिल्लाह आज दुनिया में सुन्नी लडको और लडकियों की कोई कमी नहीं और इंशाल्लाह 

क़यामत तक अहले सुन्नत बड़ी तादाद में शान व शौकत के साथ कायिम रहेंगे .

वहाबियो से निकाह करना कैसा ?

हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर रज़ी अल्लाहु तआला अन्हुमा से रिवायत है की गैबदा नबी  सैय्यदे  आलम 

नुरे मुजस्सम सलाल्लाहू अलैहि वसल्लम ने गैब की खबर देते हुए इरशाद फ़रमाया :

निकाह किस से करे ?
निकाह किस से करे ?

बेशक कौमे बनी इस्राईल बहत्तर फिरको में  बट गयी और मेरी उम्मत तिहत्तर फिरको में बट जाएगी 

सबके सब जहान्न्मी होंगे सिर्फ एक फिरका जानन्ति होगा . साहब-ए-किराम ने अर्ज किया या रसूलल्लाह ! वह 

जन्नती फिरका कौनसा होगा? सरकारे दो आलम  सल्लल्लाहु तआला अलैहि  वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया 

जो मेरे और मेरे  सहाबा के अकीदे पर होगा ( तिर्मिजी शरीफ )

अल्ह्म्दुलिल्लाह ! बेशक वह जन्नती फिरका अहले सुन्नत वल-जमात  के सिवा कोई नहीं क्यूंकि हम सुन्नी 

अल्लाह रब्बुल-इज्जत व हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मरातिब व अजमत को और 

साहब-ए-किराम  व बुजुर्गाने दिन की शान व अजमत को दिलो से मानने वाले है और अलहम्दु लिल्लाह ! हम 

उन्ही के अकीदे पर कायिम है , हम सुन्नियो का अकिदा है की तमाम फिरके मसलन राफजी, वहाबी, तबलीगी, 

देवबंदी,मौदूदी, नेचरी, चक्दाल्वी, काद्यानी, वगेरह सबके सब गुमराह बद्दीन , काफिर व मुर्तद  दिने इस्लाम 

से फिरे हुए मुनाफेकिन है. 

आज ज्यादा तर लोग सुन्नी वहाबी के इस इख्तेलाफ को  चंद मौलवियों का झगड़ा समझते है या फिर फातिहा 

उर्स, मिलाद, व नियाज़, का झगड़ा समझते है यक़ीनन यह उनकी बहुत बड़ी गलत फहमी है .

वहाबियो से निकाह करना कैसा ?

खुदा की कसम हम सुन्नियो का वहाबियो से सिर्फ इन्ही बातो पर इख्तिलाफ नहीं है बल्कि हम

अहले सुन्नत का वहाबियो से सिर्फ और सिर्फ इस बात पर बुनियादी इख्तेलाफ है की उन वहाबियो के 

उलमा व पेशवाओ ने अपनी किताबो और तहरिरो में अल्लाह रब्बुल इज्ज़त व हुजूरे अकरम 

सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम , अम्बिया-ए-किराम , सहाब-ए-किराम,  व बुजुर्गाने दिन की शाने 

अक्दस में गुस्ताखिया लिखी है  और उनकी शान व अजमत का मजाक उड़ाया है और मौजूदा वहाबी ऐसे ही 

जाहिल उलमा को अपना बुजुर्ग व पेशवा मानते है और उन्ही की तालीमात व अकाइदे बातिला को 

दुनिया  भर में फैलाते फिरते है, या कम अज कम उन्हें मुसलमान समझते है.

आयत : हमारा परवरदिगार अज्ज व जल्ला इरशाद फरमाता है :

तर्जमा:  जिस दिन हम हर जमात को उनके इमाम (पेशवा) के साथ बुलाएँगे 

(पारा 15, सुरह बनी इसराइल कन्जुल ईमान )

उम्मीद है आपको इस पोस्ट में जरुरी जानकारी हासिल होगी इस दौर ए फितना में हमे अपना ईमान 

सम्भलना बहुत जरुरी है हम हमे इन बातो की जानकारी होगी तभी हु बाख पाएंगे या अपनी बेहेंन

बेटे बेटियों को इन फिरका परस्तो से निकाह में बंधने से बचा पाएंगे लोग आजकल यही सोचते है 

रिश्ता अच्छा है कर लो क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन दोस्तों ये जानलो फर्क अभी पड़े या न पड़े लेकिन मिटटी में 

मिलते ही सारा फर्क पता चलने लग जाएगा वो भी क़यामत तक और सोचिये रोज़े क़यामत हम क्या मुंह 

दिखयेंगे , इसलिए सोच समझकर काम कीजिये अपने बच्चो को सुन्नी सहिउल अकीदा के साथ ही रिश्ता कराईये 

ताकि उनकी दुनिया व आखिरत दोनों ही संवर जाए 

इसका मौजू बहोत बड़ा है  दूसरी पोस्ट में हम पढेंगे क्या वहाबी मुसलमान है ?

अल्लाह पाक हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाए अमिन या रब्बुल आलमीन ! 

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