शबे जुफाफ (सुहागरात ) के आदाब

अस्सलाम अलैकुम , दोस्तों आज की इस पोस्ट  में  बहुत ही अहम् मसले पर यानि शबे जुफाफ (सुहागरात ) के आदाब के बारे में बात करेंगे और आपको इस बारे में भी इस्लाह दी जाएगी की एक मर्द और औरत को इन अदाबो से रूबरू होना चाहिए सिर्फ शादी करना और बस यही तक बात नहीं होती है आप मुसलमान है और आप को इन बातो को जानना बहुत ही ज्यादा जरुरी है इसमें कोई हसी मजाक या किसि भी तरह की शर्म  की बात नहीं की हम जब कुछ सिख रहे है तो  कोई गलती न हो इसलिए आपको  कोंनसी बातो का ख़याल रखना है आने वाली ज़िन्दगी के लिए निहायत ही यह मसले की मालूमात होना जरुरी है हम किसी से पूछ नहीं सकते तो अपने आप से पढ़ तो सकते है !

हमारा दिन बहुत ही खुबसूरत है हमे हर काम के लिए तौर तरीके बी आदाब बताये गए है

आप पढ़िए और आप अपनी  हमराह के साथ भी इसे शेयर कीजिये अपने दोस्त अहबाब

जो भी आपसे करीब है उन्हें मालूमात दीजिये और एक बात याद रखिये अल्लाह पाक ने

हमे इज़ाज़त स दी है बेशक हक़ कहने सुनने में शरमाना नहीं चाहिए. 

यह भी पढ़े :-शादी की रस्मे

शबे जुफाफ

जब दुल्हा दुल्हन कमरे में आये और तन्हाई हो तो बेहतर यह है की सबसे पहले दुल्हन , दुल्हा दोनों

वुजू कर ले और फिर पाक कपड़ा बिछाकर दो रकात शुक्राने की नफ्ल नमाज़ पढ़े .

अगर दुल्हन हैज़  की हालत में हो तो नमाज़ न पढ़े लेकिन दुल्हा जरुर पढ़े (नोट :- दुल्हन होने वाली लड़की

की तारीख देखकर ही निकाह की तारीख मुक्र्रर की जाये जिसे की वह हर नमाज़ अदा करे क्यूंकि ये

उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दिन होता है और शुक्राने की नमाज़ पढ़ना यानि अल्लाह पाक का शुक्र

अदा करना और इसके लिए आपको तफसीर से पूरी पोस्ट पढनी होगी जो की आपको इस्लाही दिनी

मालूमात इस केटेगरी में मिल जाएगी )

सुहागरात के आदाब

हदीस:- हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसउद रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है :-

“एक शख्स ने उनसे बयान किया की मैंने एक जवान लड़की से निकाह किया है और मुझे अंदेशा है की

वह मुझे पसंद नहीं करेगी हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसउद रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया

“मुहब्बत व उल्फत अल्लाह की तरफ से होती है और नफरत शैतान की तरफ से , जब तुम अपनी

बीवी पास जाओ तो सबसे पहले उससे कहो की वह तुम्हारे पीछे दो रकात नमाज़ पढ़े .

इनशाअल्लाह  तुम उसे मुहब्बत करने वाली और वफ़ा करने वाली पाओगे

(गुनियातुत्तालेबिन | बाब न, 5, सफा नं. ११५ )

नमाज़ की नियत :- नियत की मैंने दो रकात नमाज़ नफ्ल शुक्राने की , वास्ते अल्लाह तआला के

मुंह मेरा कआबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर | फिर जिस तरह दूसरी नमाज़े पढ़ी जातीं हैं

उसी तरह यह नमाज़ भी पढ़े . (यानि पहले अल्हुम्दु शरीफ फिर कोई एक सूरत मिलाये ) नमाज़

के बाद इस तरह  से दुआ करे:- ए अल्लाह ! तेरा शुक्र व एहसान है की तूने हमे यह दिन दिखाया

और हमे इस ख़ुशी और  नेअमत से नवाज़ा औए हमे अपने प्यारे हबीब सल्लल्लाहु तआला अलैहि

व सल्लम की इस सुन्नत पर अमल करने की तौफीक अता फरमाई | ऐ  अल्लाह ! मुझे इससे और

इसको मुझसे रोजी अता फरमा और हम पर अपनी रहमत हमेशा कायिम रख और हमे ईमान के

साथ सलामत रख . आमीन |

शबे जुफाफ की ख़ास दुआ

नमाज़ और दुआ पढ़ लेने के बाद दुल्हन दुल्हा सुकून व इत्मिनान से बैठ जाए फिर उसके बाद दुल्हा

अपनी दुल्हन की पेशानी के थोड़े से बाल अपने सीधे हाथ में नर्मी के साथ मुहब्बत बहरे अंदाज़ में पकड़े

और यह दुआ पढ़े :-

शबे जुफाफ (सुहागरात ) के आदाब
शबे जुफाफ (सुहागरात ) के आदाब

अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुका मीन खैरी हा व खैरी माज़ा बल्ताहा  अलैहि व आउजुबिका मीन शर्रिहा

तर्जमा:- ए अल्लाह ! मै  इस बीवी की भलाई और खैर व बरकत मांगता हु और उसकी फितरी आदतों

की भलाई  और तेरी पनाह चाहता हु उसकी बुराई और फितरी आदतों की बुराई से

हदीस:- हज़रत उम्र बिन शुएब रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है की सरकारे आल्मियांन सल्लल्लाहु

तआला अलैहि व सल्लम इरशाद फरमाते है, “जब कोई शख्स निकाह करे और पहली रात को अपनी

दुल्हन के पास जाए तो नरमी के साथ उसकी पेशानी के थोड़े बाल अपने सीधे हाथ में लेकर यह दुआ पढ़े

(अबू दाउद शरीफ जिल्द २, बाब नं. १२३, हदीस नं. ३९३, सफा नं. १५०, हिसने हिसिन सफा:नं. १६४)

शबे जुफाफ दुआ की फजीलत

शबे जुफाफ के रोज इस दुआ को पढने की फ़ज़ीलत में उलमा -ए-किराम इरशाद फरमाते है

“अल्लाह रब्बुल इज्जत इसके पढने की बरकत से मिया बीवी के दरमियाँ  इत्तिहाद व इत्तिफाक और मुहब्बत

कायिम रखेगा और औरत में अगर बुराई हो तो उसे दूर फरमा कर उसके जरिये नेकी फैलाएगा , और औरत

शोहर की खिदमत गुजार, वफादार और फर्माबरदार रहेगी.”

अगर हम इस दुआ के मनो पर गौर करे तो हम पाएंगे की इसमें हमारे लिए कितने अमन व सुकून का

पैगाम है . यह दुआ हमे दरस देती है की किसी भी वक़्त इंसान को यादे इलाही से गाफिल न होना चाहिए

बल्कि हर वक़्त मुआमले में अल्लाह की रहमत का तलबगार रहना चाहिए लिहाज़ा इस दुआ को

शादी की पहली रात जरुर पढ़े .

एक बड़ी गलत फहमी :-

कुछ लोगो का ख़याल है की, जब किसी कुंवारी से पहली बार सोहबत की जाये तो उससे खून का

निकलना जरुरी है. चुनांचे यह खून का आना उसके बा इस्मत , पाक दामन होने का सुबूत समझा जाता है

अगर खून न देखा गया तो औरत बदचलन , आवारा समझी जाती है और औरत के बा इस्मत होने

और उसकी दोशोजगी पर शुबह किया जाता है कभी कभी यह शक इस कद्र ज़िन्दगी को कडवा

और बदमजा कर देता है की नौबत तलाक तक जा पहुंचती है मुमकिन है इसका बयान जाहिर तबियत

वालो को बुरी मालूम हो लेकिन तजरेबा  शाहिद है की सैंकड़ो जिन्दगिया इसी शक व शुबह की बिना पर

तबाह हो चुकी है इसलिए इस मसले पर भी मालूमात हासिल करना और रौशनी डालना जरुरी है की इससे

क्या पता कौन अपनी ज़िन्दगी को खतम करने से यानि तलाक जेसी बुरी चीज़ से और अपना घर टूटने से

बच जाये

शबे जुफाफ के आदाब

मालूमात :- कुंवारी लडकियों के मकामे मखसूस में अंदर की जानिब एक पतली सी झिल्ली होती है

जिसे पर्दा-ए-बुकारत या पर्दा-ए-इस्मत (Hymen )कहते है उस झिल्ली में एक छोटा सा सुराख होता है

जीस से सिन्ने बुलुग के बाद हैज़ का खून अपने ख़ास दिनों में ख़ारिज होता  रहता है एसी कुंवारी से जब

पहली बार कोई मर्द मुबशरत करता है तो उसके आले के टकराने से यह झिल्ली फट जाती है

जिसके नतीजे में थोड़े से खुन् का निकलना होता है और औरत को मामूली तकलीफ का एहसास

होता है फिर यह पर्दा  हमेशा के लिए खत्म हो जाता है .क्यूंकि यह झिल्ली पतली व नाजुक होती है

तो बाज़ औकात किसी कंवारी की मामूली सी चोट या किसी हादसे की वजह से या किसी वक़्त खुद

ही फट जाती है आजकल अक्सर लडकिया साईकिल वगेराह चलाती है कुछ लडकिया खेल कूद

और वर्जिश वगेरह भी करती है जिसकी वजह से भी यह पर्दा बाज़ औकात फट जाता है

जाहिर है एसी लडकियों की जब शादी होती है तो मर्द कुछ न पाकर शक में  मुब्तला हो जाता है

शबे जुफाफ (सुहागरात ) के आदाब

किसी किसी की यह झिल्ली एसी लचकदार होती है की मुबशारत के बाद भी नहीं फटती और जिमाअ में

रुकावट का सबब भी नही बनती है और न हि खून का निकलना वाकेअ  होता है लाखो में से किसी एक की यह

झिल्ली इतनी मोती और सख्त होती है की फटती ही नहीं जिसके लिए ऑपरेशन की जरुरत पडती है.

इसलिए अगर किसी शख्स की शादी एसी कुंवारिसे हो जिससे पहली मर्तबा कराबत होने पर खून का असर

जाहिर न हो तो जरुरी नहीं की पाकदामनी पर शक करना किसी  भीं सूरत में जाईज़ नहीं , जब तक की

बदचलन होने का मुकम्मल शरई सुबुते शरई गवाहों के साथ न हो फिकह की मशहूर जमाना किताब

“तन्विरुल- अबसार ” में है :

मन जालत बुकरतुहा बिवशबातिन अव वुरुदी हैदिन औ जाराहतींन औ किबरी बिक्रिन हकीकता

यानि जिसका पर्दा इस्मत कूदने , हैज आने या जख्म या ज्यादा उम्र होने की वजह से फट जाए तो

वह औरत हकीकत में बाकेरा(कुंवारी , पाक दामन ) है .

शबे जुफाफ (सुहागरात ) के आदाब

शबे जुफाफ की बाते दोस्तों से कहना 

कुछ लोग अपने दोस्तों को जुफाफ (पहली रात )  में बीवी के साथ की हुई बाते मजे लेकर सुनाते है , दुल्हा

अपने दोस्तों को बताता है और दुल्हन अपनी सहेलियों को बताती है सुनने वाला और सुनाने वाला उसे बड़ी

दिल्च्स्पी के साथ मजे ले लेकर सुनते है और लुत्फ़ उठाते है यह बहुत ही  जाहिलाना तरिका है भला इससे ज्यादा

बेशर्मी और बेहयाई की बात और क्या हो सकती है

हदीस:- हज़रत अबू हुरैराह रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है:

जमाना ए जाहिलियत में लोग अपने दोस्तों को और औरते अपनी सहेलियोको रात में की हुई  बाते और हरकते

बताया करते थे चुनांचे सरकारे मदीना सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम को इस बात की खबर आई तो

आपने उसे सख्त नापसंद फरमाया जौर इरशाद फरमाया :

जालिका मिशल शयतानातिन लाकियात शयताना फिस्स्काती फकदा मिन्हा  हाजताहू  वन्नासु यनजुरुना

इलैही , जिस किसी ने सोहबत की बाते लोगो में बयान की उसकी मिसाल एसी है जैसे शैतान औरत ,

शैतान मर्द से मिले और लोगो के सामने ही खुले आम सोहबत करने लगे

तो दोस्तों उम्मीद है की आप इससे सबक हासिल करेंगे और इन बातो को अपनों तक पहुचाएंगे और अगर अब तक

एसी बाते हसी मजाक में करते थे तो तौबा करेंगे अल्लाह पाक हमें कहने सुनने से ज्यादा अमल करने की

तौफीक अता फरमाए अमिन या रब्बुल आलिम ! जज़कल्लाह खैर !

 

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