शादी की रस्मे

बिस्मिल्लाहहिर्रहमाननिर्रहीम 

आज कल मुसलमानों में बहुत सी एसी एसी शादी की रस्मे पाई जाती हे की अल्लाह  रहम करे इसी टॉपिक पर हम आपको कुछ मुख़्तसर से बयान करेंगे की  कुछ लोग या आज कल तो बहुत सी मुसलमानों की तादाद एसी हो गयी है की सुन्नतो को छोड़कर रस्मो के नाम पर बेहूदापन और बेहयाई लादे है , और उन्हें  समझाओ तो समझने का नाम ही नहीं लेते हम बुजुर्गाने दिन की किताबो से आपके लिए ये जानकारी लाये है जिसे आप पढ़िए और इन फजूल की रस्मो से खुद भी बचिए और  दुसरो को भी बचाईये .

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दुनियावी  गैर जरुरी रस्मे  

शादी में तरह तरह की रस्मे बरती जाती है . हर मुल्क में रस्म हर कौम और हर परिवार, खानदान का

अपना अलग अलग  ही रिवाज होता है .पर यह कोई समझने के लिए तैयार ही नहीं है की ये रस्मे

शरअन कैसी है ? सही है या गलत? और जरुरी भी है की रस्मो की पाबंदी इसी हद तक की जाये

की  किसी हराम काम में मुब्तला न हो . कुछ लोग यह भी देखा गया है की रस्मो की इतनी पाबन्दी

करते है की जाएज़ न जाएज़ का फर्क ही नहीं देखते बस रस्म अदा होनी चाहिए .

शादी की रस्मे
शादी की रस्मे

 निकाह की  दुनियावी रस्मे

मगर  हमारे वतन हिन्दुस्तान में आम तौर पर बहुत ही रस्मो की पाबन्दी की जाती है जैसे, रतजगा , हल्दी,

नहारी. शादी के पहले या बाद में जुवा खेलना, ढोल बजे, नाच , गाना, बजो और पटाखों और आजकल दी जे

के साथ बारात निकालना, विडियो रेकॉर्डिंग , वगेरह. जबकि इन रस्मो में बेपर्दगी, छिछोरापन, बेहयाई,

अय्याशी  और हराम कामो का वजूद होता है. जवान लड़के और लडकिया हल्दी इस तरह खेलते है की

जिस तरह हिन्दुओ के त्यौहार में होली  खेली जाती है. नाचना, गाना, बेहूदा हसी मजाक, और तरह तरह की

तहजीब से गिरी हुई हरकते करते है. अगर इन तमाम रस्मो कि पाबन्दी के लिए रूपये न हो तो सूद पर रूपये

क़र्ज़ लेने से भी नहीं रुकते है. यहाँ मुमकिन नहीं की हर रस्म पर अलग अलग उन्वान कायिम करके

ताफ्लिसी बहस की जाये इसलिए यहाँ चंद हदीसे  पेश है जो की हमारी इस्लाह के लिए ही है इंसाफ पसंद के लिए

इसी कद्र काफी है और हटधर्म जाहिल के लिए कुरआन व अहादीस के खजाने भी नाकाफी है .

शादी की रस्मे

आयत:- अल्लाह रब्बुल इज्ज़त इरशाद फरमाता है :

वला तुबज्जिर तब्जिरा इन्नलमुब्ज्जिरिना  कानुआ इख्वान्शयातिना वकाना शय्तानो लिरब्बिही  कोफुरा .

और फुजूल न उड़ा , बेशक (फुजूल)उड़ाने वाला शैतानो के भाई है और शैतान अपने रब का बड़ा नाशुक्रा है

(सुरह बनी  इस्राईल तर्जमा कन्जुल ईमान )

हदीस:- सरकारे मदीना  सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

” बेशक सूद का एक रुपया लेना छत्तीस मर्तबा जीना करने से बढ़कर है, बेशक सूद लेना अपनी  माँ  के साथ

जीना करने से भी बदतर है ” ( ब हवाला फतावा मुस्ताफिया जिल्द 1, सफा नंबर ७६)

हदीस:- हुजूरे अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

“जिसने जुवा खेला गोया उसने खिंजिर (सुअर ) के गोश्त और खून में हाथ धोया ” ( मुस्लिम शरीफ , अबू  दाउद

शरीफ, मुकाशिफ्तुल-कुलूब, बाब नंबर ९९, सफा नंबर २३५)

फतावा मुस्ताफिया में है ” :- ” जुए का हराम होना जीना के हराम होने की तरह है की जीना भी हरामे कतई

और जुवा भी  हरामे कतई “( फतावा मुस्तफिया जिल्द 1, सफा नंबर ७७)

शादी की रस्मे

हदीस:- नबिए  करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया :

” सबसे पहले गाना इब्लीस मरदूद ने  गाया “.

हज़रत इमाम मुजाहिद रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु फरमाते है :- ” गाने बाजे शैतान की आवाजे है जिसने उन्हें सुनाया

गोया उसने शैतान की आवाज़ सुनी “(हादियुन्नास  फी रुसुस्मुल-एरास सफा नंबर 18, अज: आला हज़रत अलैहिर्र्मा )

हज़रत शफीक बिन सलमा रज़ी  अल्लाहु तआला अन्हु रिवायत करते है की , हज़रत अब्दुल्लाहबिन मसउद रज़ी

अल्लाहु तआला अन्हु ने इरशाद फरमाया ” गीत गाने ढोल बाजे दिल में यु निफाक  उगाते है जैसे पानी सब्जा उगाता है “

(तम्बिहुल- गफिलिन सफा नंबर १७०)

शादी की रस्मे

सुल्तानुल मशाईख  महबूबे इलाही हज़रत ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु अपनी म्ल्फुजात

“फवाइदुल – फवाद शरीफ ” में  इरशाद फरमाते है : ” मजामीर हरम अस्त “यानि ढोल बाजे हराम है

( फवाइदुल – फवाद  शरीफ, बाब सोम पांचवी मजलिस, सफा नंबर १८९)

हजरत मखदूम शर्फुले मिल्लत वद्दीन यहिया मुनयरी  रज़ी अल्लाहु  तआला अन्हु ने ढोल बाजो को मिस्ल

जीना हराम फरमाया है ( बहवाला: अहकामे शरियत जिल्द २, सफा नंबर १५६)

आला हज़रत रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु इरशाद फरमाते है :

उबटन मलना जाएज़ है और दुल्हा की उम्र नौ दस साल की हो तो अजनबी औरतो का उसको उबटन बदन

पर मलना भी गुनाह नहीं हा बालिग़ के  बदन पर ना महरम औरतो का मलना ना जाएज़ है और बदन को हाथ तो

माँ भी नहीं लगा सकती यह हराम और सख्त हराम है और औरत और मर्द के दरमियान शरियत ने कोई मुंह बोला

रिश्ता न रखा यह शैतानी व हिन्दुवानी रस्म है ( फतावा रजविया जिल्द 9, निष्फ आखिर, सफा नंबर  १७० )

शादी की रस्मे 

आजकल शादी ब्याह में विडियो शूटिंग करवाना शादी का एक हिस्सा बन चुका है , उधर काजी साहब निकाह  का खुतबा 

पढ़ रहे है कालन्नाबियु सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम अन्निकाहू मीन सुन्नती और उधर वो शैतानी आला सामने आ खड़ा हुआ 

फिर उसी पर बस नहीं बल्कि यह शैतानी आला यानि विडियो कैमरा जनाना कमरे में पहुचा और हमारी माँ बहनों को 

बेपर्दा करने लगा जिन लोगो से हमारी माँ बहने पर्दा करती थी और जिन लोगो ने उन्हें पहले कभी नही देखा था 

लेकिन अब वो विडियो के जरिये खुलेआम मजलिस में दिखाई दे रही है. 

कैसे कैसे मंजर  कैमरा  में कैद हो जाते है कही कोई बाल बनती है, कही कोई पल्लू सवरती है . और कभी कभी तो 

कोई माँ अपने बच्चे को दूध पिलाती है उसे गुमान भी नहीं होता की उसकी विडियो ग्राफी की जा रही है. औरतो के वह मनाजिर 

भी विडियो फिल्म की जीनत बन जाते है जिसे बाद में देखने में  शर्म व हया से सर निचे हो  जाता है .

शादी की रस्मे ( विडियो शूटिंग )

हदीस:- प्यारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते है:बेशक रोजे क़यामत सबसे ज्यादा 

आजाब उस पर होगा जिसने किसी नबी को शहीद किया या उसे किसी नबी ने क़त्ल फरमाया हो और तस्वीर 

बनाने वाले पर .

हदीस:- हज़रत अबू तल्हा  रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है की, रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि 

वसल्लम ने इरशाद फरमाया: रहमत के फ़रिश्ते उस घर में नहीं जाते जिस घर में कुत्ता या जानदार की तस्वीर हो.

(बुखारी शरीफ )

हदीस:- एक हदीसे पाक में है : और वह घर जिसमे रहमत के फ़रिश्ते न आये सब घरो से बदतर है 

नोट :-तस्वीर खीचने और खिचवाने पर सैकडो वाईद आई है वह सब यहाँ बयां कर पाना मुमकिन नहीं है लिहाजा 

जयदा तफसील के लिए  इमामे अहले सुन्नत आला हज़रत रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु की किताब 

शिफा-उल-वाला फी सुवरिल-हबिबे  व सवारिही व निआलिही  का मुताला कीजिये जिसमे काफी तफसील 

 मौजूद है . और आखिर में बस यही दुआ करेंगे की अल्लाह पाक अपने प्यारे हबीब मुहम्मद मुस्तफा  सल्लल्लाहु 

 तआला अलैहि वसल्लम के तुफैल से हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाए 

अमिन या रब्बुल आलमीन ! 

निकाह के लिए लड़की की इज़ाज़त

निकाह कहा करे ?

 

 

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