हजरते सिद्दीक अकबर र.अ. का ख्वाब

अस्हसलाम  अलैकुम दोस्तों इस पोस्रट में हम पढेंगे की किस तरह हजरते  सिद्दीक अकबर रजियाल्लाहू अन्हु को अपने ख्वाब में चाँद और सूरज की खवाब की ताबीर में खिलाफत और हुजुर अलैहिस्सल्म के वजीर बन्ने की ताबीर  हुई  | हजरते सिद्दीक अकबर रजियाल्लाहू अन्हु का ख्वाब | इस्लामी वाकियात  | सच्ची बात | सच्ची हिकायत 

हजरते सिद्दीक अकबर र.अ. का ख्वाब

हज़रत सिद्दिके अकबर र.अ. का ख्वाब
हज़रत सिद्दिके अकबर र.अ. का ख्वाब

हज़रत सिद्दिके अकबर  रजियाल्लाहू अन्हु  कबले अज इस्लाम एक बहुत बड़े ताजिर थे .

आप तिजारत के सिलसिले में मुल्के शाम में तशरीफ़ फरमा थे की एक रात ख्वाब में देखा के चाँद और सूरज 

आसमान से उतर कर उनकी गोद में आ पड़े है , हजरते सिद्दिके अकबर रजियाल्लाहू अन्हु ने अपने 

हाथ से चाँद और सूरज को पकड़कर अपने सिने  से लगाया और उन्हें अपनी चादर के अंदर कर लिया .

सुबह उठे तो एक इसाई राहिब के पास पहुंचे और उससे इस ख्वाब की ताबीर पूछी , राहिब ने पूछा 

आप कौन है ? आपने फरमाया में अबुबक्र हु . और मक्का का रहने वाला हु . 

हजरत सिद्दिके  अकबर रजियाल्लाहू अन्हु का ख्वाब

राहिब ने पूछा कौनसे काबिले से है आप ? फ़रमाया बनू हाशिम से . रहिब ने पूछा  और जरियाए मआश 

क्या है? फ़रमाया तिजारत ! राहिब ने कहा के फिर गौर से सुनो नबी आखिर उज्ज्मा हजरते मोहम्मद 

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ ले आये है वो भी इसी काबिले बनू हाशिम से है 

और वो आखरी नबी है. अगर वो न होते तो खुदाए तआला जमींन व आसमान को पैदा न फरमाता 

वो अव्वलीन व आखिरिन के सरदार है और ए अबुबक्र ! तुम उसके दिन में शामिल होगे और

उसके वजीर और उसके बाद उसके खलीफा बनोगे ये है तुम्हारे ख्वाब की ताबीर और ये भी सुन लो मैंने 

उस पाक नबी की तारीफ तौरात व इंजील में पढ़ी है और में उस पर ईमान ला चूका हु और मुसलमान हु 

लेकिन इसाइयों के खौफ से अपने ईमान का इज़हार नहीं किया .

हजरते सिद्दीक अकबर र.अ. का ख्वाब 

हजरते सिद्दीक अकबर रजियाल्लाहू  अन्हु ने जब अपने ख्वाब की ताबीर सुनी तो

इश्के रसूल का जज्बा बेदार हुआ और आप फ़ौरन  मक्का मोअज्ज्मा में वापिस आये और

हुजुर अलैहिस्सलाम कि तालाश  करके बारगाहे रिसालत में हाजिर हुए और दीदार ए पुर अनवार से

अपनी आखो को ठंडा किया हुजुर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया ,अबू बक्र तुम आ गए लो अब जल्दी करो 

और दिने हक़ में दाखिल हो जाओ ! सिद्दिके अकबर ने अर्ज किया बहुत अच्छा हुजुर ! मगर कोई मोअज्जजा 

तो दिखाईये हुजुर अलैहिस्सलाम ने फरमाया , वो ख्वाब जो शाम में देखकर आये हो वो और उसकी ताबीर जो 

उस राहिब से सुनकर आये हो मेरा ही तो मोअज्ज्जा है . सिद्दिके अकबर ने ये सुनकर अर्ज किया :- 

स्दकता या रसूलअल्लाहि ! अना अशहदअन्नका  रसूलल्लाह . सच फ़रमाया ए अल्लाह के रसूल आपने 

और में गवाही देता हु के आप वाकई अल्लाह के  सच्चे  रसूल  है . 

सबक :-

हज़रत अबू बक्र सिद्दीक राज़ियाल्लाहू अन्हु हुजुर सल्लाल्ल्हू तआला अलैहि वसल्लम के वजीर और 

खलीफा बरहक है और हमारे हुजुर सल्लाल्ल्हू अलैहि वसल्लम से कोई बात छुपी नहीं रहती आप 

दाना ए गयुब है और ये भी मालूम हुआ के तमाम मखलूक हमारे हुजुर के ही सड़के में पैदा की गयी है 

और अगर हुजुर अलैहिस्सलाम न होते तो कुछ न होता .

वो जो न थे तो कुछ न था,  वो जो न हो तो  कुछ न हो ,

जांन है वो जहां की, जांन है तो जहाँन है ! 

 

एक अक्लमंद बुढ़िया

हज़रत इमाम ए आज़म और दहरिया

 

 

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