हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहू अन्हा

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ” अल्लाह के नाम से शुरू जो बड़ा ही करीम निहायत ही रहम वाला है “

ताज्किरए  सालिहात ( चाँद नेक औरतो के हाल )

“ये वो माये है जिनकी गोद में इस्लाम पलता था इसी गैरत से इंसान नूर के सांचे में ढलता था “

इस पोस्ट में ख्वातिने इस्लाम  हजरत खदीजा राज़ियल्लाहू अन्हा और 

 उन  मुकद्दस बीबियो का मुख़्तसर तजकिरा है जो की तारीखे इस्लाम 

में सलिहात (नेक बीबियों ) के लकब से मशहूर है ताकि आजकल माँ बहनों को उनके वाकियात और

उनकी मुकद्दस जिंदगी के मुबारक हालत से इबरत व नसीहत हासिल हो और यह उनके नक्शे कदम पर चलकर 

इन काबिले एहतराम ख्वातीन की लज़ीज़ हिकायतो  को हम रसूलल्लाह सल्लाहू अलैहि वसल्लम 

की मुकद्दस बीबियो के जिक्र जामिल से शुरू करते है जो तमाम उम्मत की माये है .

अपनी जिंदगी सवार ले . जिनकी फ़ज़ीलत व अजमत का खुतबा पढ़ते हुए कुराने अज़ीम ने कियामत 

तक के लिए यह एलान फरमा दिया है की -“ए नबी की बीबियो ! तमाम जहाँ की औरतो में कोई 

भी तुम्हारी मिस्ल नहीं है !”

हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहू अन्हा
हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहू अन्हा

हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहू  अन्हा 

आप रसूलल्लाह सल्लाहू अलैहि वसल्लम आपकी सब से पहली बीवी और रफिकए  हयात ( जीवनसंगिनी ) है

आप खानदाने कुरैश की बहोत ही बावकार और मुमताज़ खातून है .आपके वालिद का नाम 

खुवैलिद इब्ने असद और आपकी माँ का नाम फातिमा बिन्ते ज़ायेदा है .

आपकी शराफत और पाक दामनी की बिना पर तमाम मक्का वाले आपको ” ताहिरा” के लकब से 

पुकारा करते थे . हजरत खदीजा राज़ियल्लाहू अन्हा ने

हुजुर  अलैहिस्स्लातु वस्सलाम आपके अख़लाक़ व आदात और जमाले सूरत (खूबसूरती)

व कमाले सीरत ( अच्छे चरित्र ) को देखकर आपसे निकाह की रगबत (ख्वाहिश ) जाहिर की 

इसलिए अशराफे कुरैश के मजमा में बाकायदा निकाह हुआ 

आप रसुल्लुलाह  सल्लाहू अलैहि वसल्लम की बहुत ही जाँ-निसार और वफ़ा शेआर बीवी है .

और हुजूरे अक्दास सल्लाहू अलैहि वसल्लम को आपसे बहुत ही बे पनाह मुहब्बत थी .

चुनांचे जब तक आप जिंदा रही , आपने किसी दूसरी औरत से निकाह नहीं फरमाया .

और मुसलसल पच्चीस साल तक महबूबे खुदा की जां-निसारी व खिदमत गुजारी के शरफ से 

सरफ़राज़ रही. हुजुर अलैहिस्सलातु वस्सलाम आपको भी उनसे इस कद्र मुहब्बत थी की 

उनकी वफात के बाद आप अपनी महबूब तरीन बीवी हजरत अम्मा आयशा रज़िअल्लाहू  अन्हा से 

फ़रमाया करते थे की खुदा की कसम ! ख़दीजा से बेहतर मुझे कोई बीवी नहीं मिली .

जब सब लोगो ने मेरे साथ कुफ्र किया उस वक़्त वह मुझ पर ईमान लायी और जब सब लोग मुझे झुठला 

रहे थे उस वक़्त उन्होंने मेरी तस्दीक की . और जिस वक़्त कोई शख्स मुझे कोई चीज़ देने के लिए 

तैयार न था उस वक़्त  खदीजा  رضي الله عنهم ने मुझे अपना सारा माल सामान दे दिया और उन्ही के

शिकम से अल्लाह तआला ने मुझे औलाद अता फरमाई ( जु रकानी जि . 3 २२४ व इस्तिआब जि.4 स. १८१७ )

हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहू अन्हा
हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहू अन्हा

हज़रत खदीजा राज़ियल्लाहू अन्हा  

इस बात पर साडी उम्मत का इत्तेफाक है की सब से पहले हुजुर  सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आपकी 

नुबुव्वत पर यही ईमान लाई और इब्तेदाए इस्लाम में जब की हर तरफ आपकी मुखालफत का तूफ़ान 

उठा हुआ था . ऐसे खौफनाक और कठिन वक़्त में सिर्फ एक हज़रत खदीजा  رضي الله عنهم की ही ज़ात थी 

जो परवानो की तरह हुजुर ﷺ पर कुर्बान हो रही थी .

और इतने खतरनाक औकात में अल्लाह ताला पर यकीं रखकर सबर और हिम्मत के साथ उन्होंने खतरों और 

मुसीबतों का मुकाबला किया आप की इसी खूबी  की वजह से तमाम बीबियो में हजरत खदीजा राज़ियल्लाहू अन्हा

आपको विशिष्ठ प्रतिष्ठा यानि बुजुर्गी ( विशेषता )हासिल है.

उनके फ़ज़ाइल ( बुजुर्गी प्रतिष्ठा ) में बहोत सी हदीसे आई है इसलिए हुजूरे अकरम  ﷺ आपने फरमाया 

की तमाम दुनिया की औरतो में सबसे ज्यादा अच्छी और बाकमाल चार बिबिया है .

एक हज़रत मरयम, दूसरी हज़रत आसिया फिरौंन की बीवी, तीसरी  हजरत खदीजा राज़ियल्लाहू अन्हा

, चौथी हज़रत फातिमा  رضي الله عنهم .

एक मर्तबा हज़रत जिबरील अलैहिस्सलाम दरबारे नुबुव्वत में हाजिर हुए और अर्ज़ किया की ,

ऐ मुहम्मद ﷺ यह खदीजा है जो आपके पास एक बर्तन में खाना लेकर आ रही है , जब यह आपके पास 

आ जाये तो उनसे उनके रब का और मेरा सलाम कह दीजिये और उनको यह खुशखबरी 

सुना दीजिये की ज़न्नत में उनके लिए मोती का घर बना है जिस में न कोई शोर होगा न कोई तकलीफ होगी 

(बुखारी जी. 1 स. ५३९ ) 

हज़रत खदीजा रज़िअल्लहु अन्हा 

सरकारे दो जहां  صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ने उनकी वफात के बाद बहुत सी औरतो से निकाह फरमाया 

लेकिन हज़रत खदीजा  رضي الله عنهم की मुहब्बत आखिरी उम्र तक हुजुर صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ के 

मुबारक दिल में रची बसी रही यहाँ तक की उनकी वफात के बाद जब भी हुजुर صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ के घर 

में कोई बकरी जबह होती तो आप हजरत खदीजा राज़ियल्लाहू अन्हा की सहेलियों के यहाँ भी जरुर गोश्त भेजा करते थे 

और हमेशा आप बार-बार हजरत खदीजा राज़ियल्लाहू अन्हा का ज़िक्र फरमाते रहते थे .

हिजरत से तिन बरस पहले पैंसठ बरस की उम्र पा कर माहे रमजान में मक्का मुकर्रमा के अंदर 

हजरत खदीजा राज़ियल्लाहू अन्हा आपने  वफात पाई और मक्का मुकर्रमा के मशहूर कब्रिस्तान 

जैहून (जन्नतुल मुअल्ला ) में खुद हुजूरे अक्दस صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ने उनकी कब्र में उतरकर  अपने मुकद्दस 

हाथो से उनको सुपुर्दे ख़ाक फ़रमाया उस वक़्त तक नमाज़े ज़नाज़ा का हुक्म नाजिल नहीं हुआ था 

इसलिए हुजुर अलैहिस्सलाम ने उनके जनाज़ा पर नमाज़ नहीं पढाई . हज़रत खदीजा रज़िअल्लहु अन्हा की 

वफात से तिन दिन या पांच दिन पहले हुजुर अलैहिस्सलाम के चचा अबू तालिब का इन्तेकाल हो गया था 

अभी चाचा की वफात के सदमे से  हुजुर अलैहिस्सलातू वस्सलाम का कल्बे नाजुक रंज व गम से निढाल था 

हि की हजरत खदीजा रज़िअल्लहु अन्हा का इन्तेकाल हो गया इस सानेहा ( हादसे ) कल्बे मुबारक पर 

इतना जबर्दस्त सदमा गुजरा की आपने उस साल का नाम ‘आमूल हुज्न ‘(गम का साल ) रख दिया 

तब्सेरा ( कमेंट / टिप्पणी / कोन्क्लुसन )

हज़रत उम्मुल मोमिनीन बीबी खदीजा रज़िअल्लहु  अन्हा की मुकद्दस जिंदगी से माँ बहनों को सबक हासिल 

करना चाहिए की उन्होंने कैसे कठिन और मुश्किलात दौर में हुजूरे अकरम صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ पर 

अपना तन, मन, धन, सब कुछ कुर्बान कर दिया और सीना सिपर होकर तमाम मुसीबतों  व मुश्किलों का 

मुकाबला किया और पहाड़ की तरह ईमान व अमले सालेह पर साबित कदम रही .

और मुसीबतों और परेशानियों के तूफ़ान में निहायत ही जां-निसरी के साथ हुजुर صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَकी 

दिलजुई और तसकीने क्लब का सामान करती रही और उनकी इन कुर्बानियों का दुनिया ही में उनको 

यह सिला मिला की रब्बुल आलमीन का सलाम उनके नाम लेकर हजरत जिबरील अलैहिस्सलाम 

नाजिल हुआ करते थे | इससे मालूम हुआ की मुश्किलों और परेशानियों में अपने शोहर की दिलजुई 

और तसल्ली देने की आदत खुदा के नजदीक महबूब व पसंदीदा खसलत है. लेकिन अफ़सोस की 

इस जमाने में मुसलमान औरते अपने शोहरो की दिल जुई तो कहाँ ? उलटे अपने शोहरो को परेशान 

करती है . कभी तरह तरह की फरमाइशे करके , कभी झगड़ा तकरार करके , कभी गुस्सा में मुंह 

फुला कर के. माँ , बहनों ! तुम्हे खुदा का वास्ता अपने शोहरो का दिल न दुखाओ और उनको  परेशानियों में 

न डाला  करो  बल्कि आड़े वक्तो में अपने शोहरो को तसल्ली देकर उनकी दिल जुई किया करो .

हज़रत अली कोट्स

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