हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम ” अल्लाह के नाम से शुरू जो बड़ा ही करीम निहायत ही रहम वाला है “

ताज्किरए  सालिहात ( चाँद नेक औरतो के हाल )

ये वो माये है जिनकी गोद में इस्लाम पलता था इसी गैरत से इंसान नूर के सांचे में ढलता था “

इस पोस्ट में ख्वातिने इस्लाम हज़रत आइशा रज़ियल्लाहू अन्हा और 

 उन  मुकद्दस बीबियो का मुख़्तसर तजकिरा है जो की तारीखे इस्लाम 

में सलिहात (नेक बीबियों ) के लकब से मशहूर है ताकि आजकल माँ बहनों को उनके वाकियात और

उनकी मुकद्दस जिंदगी के मुबारक हालत से इबरत व नसीहत हासिल हो और यह उनके नक्शे कदम पर चलकर 

अपनी जिंदगी सवार ले

इन काबिले एहतराम ख्वातीन की लज़ीज़ हिकायतो  को हम रसूलल्लाह सल्लाहू अलैहि वसल्लम 

की मुकद्दस बीबियो के जिक्र जामिल से शुरू करते है जो तमाम उम्मत की माये है .

जिनकी फ़ज़ीलत व अजमत का खुतबा पढ़ते हुए कुराने अज़ीम ने कियामत 

तक के लिए यह एलान फरमा दिया है की -“ए नबी की बीबियो ! तमाम जहाँ की औरतो में कोई 

भी तुम्हारी मिस्ल नहीं है !”

हज़रत आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा
हज़रत आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा

हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा

आप अमीरुल मोमिनीन हज़रत अबू बकर सिद्दीक रज़ियल्लाहू अन्हु की  साहबजादी है.

आपकी माँ का नाम ‘ उम्मे रोमान ‘ है. आप हज़रत आइशा रज़ियल्लाहू अन्हा का निकाह

हुजूरे अक्द्स सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आपके साथ हिजरत से पहले मक्का मुकर्रमा में हुआ था.

लेकिन कशानाए नबुव्वत में यह मदीना मुनव्वर के अंदर शव्वाल सन २ हिजरी में आईं .

आप हुजुर अलैहिस्सलाम की बहुत ही चहेती बीवी है.

हुजूरे अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इनके बारे में इरशाद है की, किसी बीवी के लिहाफ में

मेरे ऊपर वही नहीं उतरी मगर हज़रत आइशा जब मेरे साथ नबुव्वत के बिस्तर पर सोती रहती

तो उस हालत में भी मुझ पर वही उतरती रहती (बुखारी जि. 1 स ५३२)

हज़रत आइशा राज़ियाल्लाहू अन्हु

फिकह व हदीस के उलूम में हुजुर अलैहिस्सलाम की बीबियो के दरमियान आपका दर्ज़ा बहुत उंचा है .

बड़े-बड़े सहाबा इनसे मसाइल पूछा करते थे . इबादत मे भी उनका यह आलम था की,

नमाज़े तहज्जुद की बेहद पाबंद थीं . और  नफ्ली रोज़े भी बहुत ज्यादा रखती थीं.

सखावत और  सदकात व खैरात के मुआमले में भी हुजुर अलैहिस्सलाम की बीबियों में ख़ास तौर पर बहुत मुमताज़ थीं .

उम्मे दुर्रा रज़ियल्लाहू अन्हा कहती है की एक मर्तबा कही से एक लाख दिरहम उनके पास आये

आपने उसी वक़्त उन सब दिरहमो को खैरात कर दिया. उस दिन वह रोजदार  थीं.

मैंने अर्ज़ किया की आपने उन सब दिरहमो को बाँट दिया और एक दिरहम भी आपने बाकि नहीं

रखा कि उससे आप गोश्त खरीदकर रोज़ा इफ्तार करतीं , तो आप हजरत आइशा रज़ियल्लाहू अन्हा ने

फरमाया की अगर तुमने पहले कहा होता तो मई एक दिरहम का गोश्त मांगा लेती .

आपके फ़ज़ाइल में बहुत सी हदीसे आई है. 17 रमजान मंगल की रात मव सन ५७ या ५८ हिजरी में

मदीना मुनव्वर के अंदर आपकी वफात हुई.  हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहू अन्हु ने आपकी

नमाज़े ज़नाज़ा पढाई और रात में दूसरी अज्वाजे मुतत्हतरत ( यानि हुजुर अलैहिस्सलाम की दूसरी बीबी के रूप में  ) के

पहलू में जन्नतुल बकीअ  के अंदर दफ़न हुईं .( जुर्कानी जी. 3. स. २३४ वगेराह )

(अज्वाजे मुत्ह्ररत यानि- हुजुर अलैहिस्सलाम की बीबियों के लिए जो आपकी चहेती और वफादार जीवनसाथियो ,

के लिए कहा जाता है और जो ज़न्नत में रहनेवाली बीबियाँ है यानि हुजुर अलैहिस्सलाम आपकी बिबियां  उनके

के लिए कहा जाता है )

हज़रत सौदा रज़ियल्लाहू अन्हा

हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहू अन्हा

तब्सेरा

यह उम्र में हुजुर अलैहिस्सलाम की तमाम बीबियों में सबसे छोटी थीं . मगर इल्म व फज्ल , व तक्वा, सखावत ,

व शुजाअत , इबादत, व रियाज़त में सबसे बढ़कर हुईं . इसको फजले खुदावन्दी के सिवा और क्या कहा जा सकता है .

बहरहाल प्यारी बहनों ! हज़रत आयशा रज़ियल्लाहू अन्हा की जिंदगी से सबक हासिल करो और

अच्छे – अच्छे अमल करती रहो और अपने शोहरो को खुश रखो .

 

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