हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू अन्हा

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम “अल्लाह के नाम से शुरू जो बड़ा ही रहम वाला है “

हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू अन्हा | Hazrat Juwairiyaa radiallahu anhaa | हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू अन्हा मुख़्तसर तजकिरा 

अम्मा हज़रत जुवैरिया रज़िअल्लहु तआला अन्हा 

अस्सलाम अलैकुम, जैसे की आप जानते है हमने अपने ब्लॉग में ताज्किराए सलिहात यानि हम उम्मातियो की माये जो की हमारे प्यारे आका मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की बिबिया है उनका मुख़्तसर जिक्र व सिलसिला शुरू किया है ताकि हमे हमारी माओं के बारे में थोड़ी ही सही लेकिन जानकारी जरुरु होनी चाहिए तो  इस पोस्ट में हम  पढेंगे अम्मा हज़रत जुवैरिया राज़ियाल्लाहू तआला अन्हा के बारे में .

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हज़रत खदीजा रज़ियल्लाहू अन्हा

ताज्किराए सलिहात 

आप कबिलए बनी मुस्तलिक के सरदारे आजम हारिस इब्ने जिरार की बेटी है. गजवए  मुरैसिअ में इन का सारा कबीला 

गिरफ्तार होकर मुसलमानों के हाथो कैदी बन चुका था. और वो सब मुसलमानों के  गुलाम बन चुके थे .

मगर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने जब हज़रत जुवैरिया को आज़ाद करके उनसे 

निकाह फरमा लिया तो हज़रत जुवैरिया की शादमानी व मसर्रत की कोई इन्तेहा नहीं रही जब इस्लामी लश्कर 

में यह खबर फैली की रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हज़रत जुवैरिया से निकाह

फरमा लिया है तो तमाम मुजहिद्दिने इस्लाम एक  जबान होकर  कहने लगे की जिस खानदान में 

हमारे रसूल ने निकाह फरमा लिया उस खंडन का कोई भी फर्द लौंडी  गुलाम नहीं रह सकता .

इसलिए उस खानदान के जितने भी लौंडी गुलाम मुसलमनो के कब्जे में थे सब के सब आज़ाद कर दिए गए.

हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू अन्हा
हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू अन्हा

हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू अन्हा 

आका अलैहिस्सलाम ने आप हज़रत जुवैरिया राज़ियाल्लाहू अन्हा से निकाह फरमाया तो आप उम्मातियो की

माँ बन गयी. और आपके हुजुर अलैहिस्सलाम  के निकाह करने की वजह से आपके खानदान वालो को 

मुसलमानों ने आजाद कर दिया इसलिए हज़रत आईशा रज़ियल्लाहू अन्हा फरमाया करती थीं , की

दुनिया में किसी औरत का निकाह हज़रत जुवैरिया के निकाह से ज्यादा मुबारक साबित नहीं हुआ.

क्यूंकि उस निकाह की वजह से तमाम खानदाने बनी मुस्तलिक को गुलामी से नजात मिल गयी.

हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू अन्हा का बयान है की,   हुजुर अलैहिस्स्लातु वसल्लम के मेरे कबिले आने से पहले 

मैंने यह ख्वाब देखा था की, मदीना शरीफ की जानिब से एक चाँद चलता हुआ मेरी तरफ आया और

मेरी गोद में गिर पडा. मैंने किसी से इस ख्वाब का जिक्र नहीं किया लेकिन जब हुजुर अलैहिस्सलाम ने 

मुझसे निकाह फरमा लिया तो मैंने समझ लिया की यह मेरे उस ख्वाब की ताबीर है .

हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू तआला अन्हा 

आपका असली नाम “बर्रा” था .मगर हुजुर अलैहिस्सलाम ने आपका नाम “जुवैरिया ” रख दिया.

इनके दो भाई अमर इब्ने हारिस ,व अब्दुल्लाह इब्ने हारिस और उनकी एक बहन अमरा बिन्ते हारिस ने भी 

इस्लाम कबुल करके सहाबियत का शरफ पाया. हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू तआला अन्हा बड़ी इबादत गुजार 

और दीनदार थीं. नमाजे फज्र से नमाजे चाश्त तक हमेशा अपने वजीफो में मशगुल रहा करती थीं. 

सन पचास हिजरी में पैसंठ बरस की उमर पाकर वफात पायी.  हाकिमे मदीना मरवान ने इनकी जनाज़े की नमाज 

पढाई और जन्नतुल बकिअ में सुपुर्दे ख़ाक की गईं . 

(मदारिजुन्नुबुवत  जी. २, स. ४८१,व जुरकानी जी.3 स. २५५)

तब्सेरा:-

आप अम्मा हज़रत जुवैरिया रज़ियल्लाहू अन्हा का जिंदगी भर का यह अमल की फज्र की नमाज़ से चाश्त 

की नमाज़ तक हमेशा लगातार जिक्रे इलाही और वजीफो में मशगुल रहना यह उन औरतो के लिए 

ताजियानाये इबरत है जो नमाजे चाश्त तक सोती रहती है . अल्लाहु अकबर! 

नबिए  अकरम सल्लल्लाहु  तआला  अलैहि वसल्लम की बिबियां तो इतनी इबादत गुजर और दीनदार 

और उम्मतियो का यह हाले जार की नवाफिल का तो पूछना ही क्या? फ़र्ज़ से भी बेजार रहते है. 

कोई उठाये तो उठ जाएँगी या तो बिस्तर पर ही पड़ी रहेंगी माँ बहनों ज़रा गौर करो की हमारी माये किस तरह

इबादत गुजार थीं. और एक हमही जो की दस दस बजे तक सोते पड़े रहते है बताओ की दिन और दुनिया की 

तरक्की कैसे होगी हमारे बच्चे हमसे क्या सिख्नेगे और ईसिस हाल की वजह से हमारी कौम हर चीज़ में 

पीछे जा रही है. अल्लाह की पनाह !

अल्लाह पाक हम सबको कहने सुनने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाए आमीन या रब्बुल आलमीन !

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