हज़रत सफिय्या रज़ियल्लाहू अन्हा

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्र्हिम्, आस्लम अलैकुम इस पोस्ट में आज हम ताज्किराए सालिहात में मुख़्तसर तजकिरा पढेंगे जो की हम उम्मातियो की माँ है उम्मुल मोमिनीन हज़रत सफिय्या रज़ियल्लाहू अन्हा , अम्मा हज़रत सफिय्या रज़ियल्लाहू अन्हा .

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हज़रत जैनब रज़ी. अन्हा

तज्किराए सालिहात 

आप खैबर के सरदारे आजम “हुय्य इब्ने अख्तब ” की बेटी और कबिलए बनू नजीर के रईसे आजम

“केनाना इब्ने हुकैक ” की बीवी थीं . जो जंगे खैबर में मुसलमानों के हाथो से कत्ल हुआ. यह खैबर के

कैदियों में गिरफ्तार होकर आयीं . रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इनकी खानदानी

इज्जत व वजाहत का ख्याल फरमा कर इनको किसी की लौंडी नहीं बनने दिया . बल्कि खुद उनसे निकाह

फरमाकर अपनी अज्वाजे मुत्तहरात और उम्मत की माओं में शामिल फरमा लिया जंगे खैबर में वापसी में

तिन दिनों तक मंजिले  सहबा में  आपने उनको खेमा के अंदर अपनी कुदरत से सरफ़राज़ फरमाया .

और इनके वालिमा में खजूर घी , पनीर का मलीदा आपने सहबाए किरम को खिलाया .हुजूरे अकरम

सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इनका बहुत ख्याल रखते थे. एक मरतबा हज़रत बीबी आईशा

रज़ियल्लाहू तआला अन्हा ने उनको पस्ता कद (नाटी ) कह दिया तो हुजुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि

वसल्लम  ने हज़रत आईशा रज़ियल्लाहू अन्हा को इस कदर गुस्से में भरकर डांटा की कभी भी

उनको इतना नहीं डांटा था.

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हज़रत सफिय्या रज़ियल्लाहू अन्हा

इसी तरह एक मर्तबा हज़रत जैनब रज़ियल्लाहू  तआला अन्हा ने हज़रत सफिय्या रज़ियल्लाहू

अन्हा आपको  यहूदिया कह दिया तो यह सुनकर हुजुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम

हज़रत जैनब पर इस तरह खफा हो गए की दो तिन माह तक उनके बिस्तर पर कदम नहीं रखा.

यह बहुत ही इबादत गुजार और दीनदार होने के साथ साथ हदीस व फिकह सिखने का भी

जज्बा रखती थीं. चुनांचे दस हदीसे भी इनसे मरवी है . हज़रत सफिय्या रज़ियल्लाहू

अन्हा के वफात के साल में इख्तिलाफ है . वाकेदी ने सन पचास हिजरी और इब्ने सअद ने सन बावन हिजरी

लिखा है आप भी मदीना के मश्हुर कब्रिस्तान में जन्नतुल बकिअ में दफ़न है .

(मदारिजुन्नुबुवत जी.२, स. ४८३, व जुरकानी जी. 3 स. २५९ )

 हज़रत सफिय्या रज़ियल्लाहू अन्हा

तब्सेरा :- 

हुजूरे अकरम  सल्लल्लाहु ताआला अलैहि वसल्लम ने इन से महज इस बिना पर निकाह फरमा लिया ताकि

उनके खानदानी एजाज व इकराम में कोई कमी न होने पाए . तुम गौर से देखोगे तो हुजूरे अकदस सल्लाल्ल्हू

तआला अलैहि  वसल्लम ने ज्यादा तर जिन जिन औरतो से निकाह फरमाया वह किसी न किसी दिनी मसलेहत

ही के बिना पर हुआ. कुछ औरतो की बेकसी पे रहम फरमा कर और कुछ औरतो के खानदानी एजाज़ व इकराम

को बचाने के लिए . कुछ औरतो से इसलिए निकाह फरमा लिया की वह रंज व गम के सदमो से निढाल थीं.

लिहाजा हुजुर अलैहिस्सलाम ने उनके जख्मी दिलो पर मरहम रखने के लिए उनको यह एजाज़ बख्श दिया

की अपनी अज्वाजे मुत्तहरात में उनको शामिल कर लिया.

हज़रत सफिय्या रज़ियल्लाहू अन्हा

हुजुर अलैहिस्स्लातु वास्स्लाम का इतनी औरतो से निकाह फरमाना हरगिज़-हरगिज़ अपनी ख्वाहिशे नफ्स की

बिना पर नहीं था. और इस का सब से बड़ा सबुत यह है की हुजुर की बीबियो में हज़रत आईशा रज़ियल्लाहू अन्हा

के सिवा कोई भी कुंवारी नहीं थीं. बल्कि सब उमर दराज़ और बेवा थीं.

हलाकि अगर हुजुर अलैहिस्सलाम ख्वाहिश फरमाते तो कौन सी एसी कुंवारी लड़की थी जो हुजुर से

निकाह करने की तमन्ना न करती. मगर दरबारे नबूवत का तो तह मामला है की, शंहंशाहे दो आलम का

कोई कौल , कोई फेअल , कोई इशारा भी एसा नहीं हुआ जो दिन और दिन की भलाई के लिए न हो

अपने जो कहा और जो किया बल्कि अपने जो किया और खा वह दिन है बल्कि आप की जाते अकरम ही

मुजस्सम दिन है “

अल्लाहुम्मा सल्ली वस्ल्लिम व बारक आला सय्यदना मुहम्मदीन व आलिहि वसहबिही अज्मइन 

यह हुजूरे अकरम शान्ह्शाहे  कोनैन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वह ग्यारह अज्वाजे  मुत्तहरात  है.

जिन पर तमाम मुअर्रिखिंन का इत्तेफाक है . इनका मुख़्तसर तजकिरा हमने पढ़ लिया इंशा अल्लाह आने वाली पोस्ट्स

में और भी डिटेल में हम जानकारी यानि तजकिरा ए सालिहात पढेंगे , में कोशिश करुनी और भी जानकारी

मालूमात के साथ हम उम्मातियो की माओं का तजकिरा पेश करू और भी बहुत सी जानकारी के साथ

और आप खुद से भी पढ़ना चाहते है तो , “सिरातुल मुस्तफा ” सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पढो

अब हु  इन पोस्ट के बाद आने वाली ब्लॉग पोस्ट में आप  हुजुर  सुलताने दो आलम सल्लल्लाहु तआला

अलैहि वसल्लम की उन चार शहजादियो का मुख़्तसर तजकिरा पढेंगे जो सलिहात और नेक बीबियो

की लड़ी में आबदार मोतियों की तरह चमक रही है

jazakallah khair

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